31 August 2024 Current Affairs Questions
हैलो दोस्तों!
आप प्रतिदिन हमारी वेबसाइट SelfStudy Meter पर 30 करंट अफेयर प्रश्नों को पढ़ सकते हैं और अगले दिन सुबह 6:00 बजे इन पढ़े हुए प्रश्नों की क्विज खेल सकते हैं हमारे YouTube channel - Mission: CAGS पर, जबकि प्रतिदिन 60 करंट अफेयर प्रश्नों की क्विज खेलने के लिए व pdf डाउनलोड करने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो कर सकते हैं ।Our Telegram channel - Mission: CAGS
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क्विज खेलने के फायदे:
क्विज खेलने से आपकी रीडिंग स्किल इंप्रूव होगी, लर्निंग स्किल बढ़ेगी और आप अपनी तैयारी का स्वमूल्यांकन कर सकेंगे मतलब आप अपना याद किया हुआ चेक कर सकेंगे कि आपके द्वारा पढ़ा हुआ आपको कितना याद है?
क्विज खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी तैयारी को एक दिशा दे पाएंगे।
A1. प्लास्टिक से बनी सड़क: जयपुर सैन्य
स्टेशन की पहल
Plastic Road: A New Initiative by Jaipur Military
Station
जयपुर
सैन्य स्टेशन ने प्लास्टिक अपशिष्ट से सड़क बनाकर एक नई पहल की है। यह भारत का दूसरा सैन्य स्टेशन है जहां इस तरह
की सड़क का निर्माण किया गया है।
इस
सड़क का उद्घाटन मेजर जनरल आर.एस. गोदारा ने किया। यह सड़क पारंपरिक सड़कों की तुलना में अधिक
टिकाऊ है और कम जल्दी खराब होती है।
प्लास्टिक
कचरे से बनी सड़कें पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हैं। ये सड़कें पांच साल की बजाय दस साल तक चल सकती
हैं, जिससे प्लास्टिक कचरे का निपटान एक बेहतर तरीके
से होता है।
भारत
में प्लास्टिक अपशिष्ट सड़क वाला पहला सैन्य स्टेशन गुवाहाटी में स्थित है। यह सड़क 2019
में बनाई गई थी।
प्लास्टिक
से बनी सड़कें बनाने से न केवल प्लास्टिक कचरे की समस्या का समाधान होता है बल्कि
सड़कों की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। यह एक सतत विकास का उदाहरण है।
अतिरिक्त जानकारी
प्लास्टिक
से बनी सड़कों का निर्माण कैसे होता है? प्लास्टिक कचरे को पिघलाकर एक विशेष प्रकार के
बिटुमेन के साथ मिलाया जाता है और फिर सड़क बनाने के लिए इस मिश्रण का उपयोग किया
जाता है।
प्लास्टिक से बनी सड़कों के क्या फायदे हैं?
- अधिक टिकाऊ
- कम रखरखाव की आवश्यकता
- पानी के प्रतिरोधक
- गर्मी को कम अवशोषित करती हैं
- प्लास्टिक कचरे का निपटान
प्लास्टिक से बनी सड़कों के क्या नुकसान हैं?
- निर्माण की लागत अधिक हो सकती है।
- उच्च तापमान पर प्लास्टिक पिघल सकता है।
भारत
में प्लास्टिक से बनी सड़कों का भविष्य क्या है? भारत सरकार प्लास्टिक कचरे के निपटान के लिए कई पहल कर रही है।
प्लास्टिक से बनी सड़कें इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। आने वाले समय में देश
के कई शहरों में इस तरह की सड़कों का निर्माण हो सकता है।
प्लास्टिक सड़क निर्माण पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न
Q1. भारत में प्लास्टिक अपशिष्ट से बनी सड़क वाला
पहला सैन्य स्टेशन कहाँ स्थित है?
(a) जयपुर
(b) गुवाहाटी
(c) दिल्ली
(d) कोलकाता
Q2. प्लास्टिक कचरे से बनी सड़कों के क्या फायदे
हैं?
(a) कम टिकाऊ
(b) अधिक रखरखाव की आवश्यकता
(c) पानी को सोखती हैं
(d) प्लास्टिक कचरे का निपटान
Q3. प्लास्टिक कचरे से सड़क बनाने की प्रक्रिया में
क्या शामिल है?
(a) प्लास्टिक को पानी में घोलना
(b) प्लास्टिक को सीधे सड़क पर बिछाना
(c) प्लास्टिक को पिघलाकर बिटुमेन के साथ मिलाना
(d) प्लास्टिक को जलाकर राख का उपयोग करना
Q4. प्लास्टिक से बनी सड़कों का निर्माण किसके लिए
फायदेमंद है?
(a) केवल सरकार के लिए
(b) केवल पर्यावरण के लिए
(c) सरकार और पर्यावरण दोनों के लिए
(d) केवल सड़क निर्माण कंपनियों के लिए
Q5. प्लास्टिक से बनी सड़कों का एक संभावित नुकसान
क्या है?
(a) ये सड़कें बहुत मजबूत होती हैं
(b) इनका निर्माण बहुत सस्ता होता है
(c) उच्च तापमान पर प्लास्टिक पिघल सकता है
(d) ये सड़कें पानी को सोखती हैं
A2. खनिज अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
Supreme Court's Landmark Ruling on Mineral Rights
सुप्रीम
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ ने राज्यों को खनिजों और
खनिज युक्त भूमि पर अतिरिक्त लेवी और अधिभार लगाने का अधिकार दिया है।
राज्यों
को मिला अधिकार: इस
फैसले से राज्यों के पास केंद्र द्वारा लगाए गए रॉयल्टी के अलावा भी खनिजों पर कर
लगाने का अधिकार हो गया है।
क्यों
है यह फैसला महत्वपूर्ण: यह फैसला खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों को हजारों करोड़ रुपये का
राजस्व देने में मदद करेगा।
कानूनी
आधार:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुसार, राज्यों
के पास खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने की विधायी क्षमता है।
केंद्रीय
कानून:
हालांकि, केंद्र के खान और खनिज (विकास और विनियमन)
अधिनियम, 1957 में इस बारे में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं
होने के कारण, राज्यों के अधिकार सीमित नहीं माने गए।
किन
राज्यों को होगा फायदा: ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, गोवा, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे खनिज समृद्ध राज्य
इस फैसले से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे।
तेल
और गैस क्षेत्र: यह
फैसला तेल क्षेत्रों, खनिज तेल संसाधनों, पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू
नहीं होगा।
अतिरिक्त जानकारी:
रॉयल्टी
क्या है:
रॉयल्टी एक प्रकार का कर है जो किसी प्राकृतिक संसाधन (जैसे खनिज) का दोहन करने पर
सरकार को दिया जाता है।
संविधान
में प्रावधान: संविधान
के अनुच्छेद 246 में केंद्र और राज्यों के बीच कर लगाने के
अधिकारों का बंटवारा किया गया है।
फैसले
का प्रभाव: इस
फैसले से राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और वे खनिज क्षेत्र में विकास के
लिए अधिक धनराशि खर्च कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न
Q6. सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार, राज्यों को किस पर अतिरिक्त लेवी और अधिभार
लगाने का अधिकार दिया गया है?
(a) कृषि उत्पादों
(b) खनिजों और खनिज युक्त भूमि
(c) सेवाओं
(d) आयातित वस्तुओं
Q7. रॉयल्टी क्या है?
(a) एक प्रकार का कर जो किसी प्राकृतिक संसाधन का दोहन
करने पर सरकार को दिया जाता है
(b) एक प्रकार का शुल्क जो किसी सेवा के लिए दिया
जाता है
(c) एक प्रकार का लाभांश जो कंपनी के शेयरधारकों को
दिया जाता है
(d) एक प्रकार का अनुदान जो सरकार द्वारा किसानों
को दिया जाता है
Q8. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से किन राज्यों को
सबसे अधिक लाभ होने की उम्मीद है?
(a) कृषि प्रधान राज्य
(b) उद्योग आधारित राज्य
(c) खनिज संपदा से समृद्ध राज्य
(d) पर्यटन आधारित राज्य
Q9. संविधान का कौन सा अनुच्छेद केंद्र और राज्यों
के बीच कर लगाने के अधिकारों का बंटवारा करता है?
(a) अनुच्छेद 245
(b) अनुच्छेद 246
(c) अनुच्छेद 247
(d) अनुच्छेद 248
Q10. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का राज्यों की
वित्तीय स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(a) राज्यों की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी
(b) राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी
(c) राज्यों की वित्तीय स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं
पड़ेगा
(d) राज्यों की वित्तीय स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव
पड़ेगा
A3. भारत को मिली नई कानूनी पहचान
India's New Legal Identity
एक
नया अध्याय: 1 जुलाई, 2024 से भारत ने अपने आपराधिक न्याय तंत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव किया
है। तीन नए कानून - भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) - लागू हुए हैं।
पुराने
कानूनों को अलविदा: ये
नए कानून क्रमशः भारतीय दंड संहिता, 1860; दंड प्रक्रिया संहिता, 1898; और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को प्रतिस्थापित करते हैं। ये पुराने कानून ब्रिटिश शासनकाल के
अवशेष थे।
राष्ट्रपति
की स्वीकृति: 25 दिसंबर, 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन नए कानूनों को अपनी स्वीकृति
प्रदान की।
लोकसभा
में पेश:
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 12
दिसंबर, 2023 को लोकसभा में इन विधेयकों को पेश किया था।
ब्रिटिश
काल का अंत:
ये नए कानून भारत को ब्रिटिश काल के पुराने आपराधिक कानूनों से मुक्त कराते हैं और
देश को एक आधुनिक न्यायिक व्यवस्था प्रदान करते हैं।
अतिरिक्त जानकारी:
क्यों
बदले गए कानून? ये कानून इसलिए बदले गए क्योंकि पुराने कानून
बदलते हुए समाज की जरूरतों के अनुरूप नहीं थे। नए कानून में कई आधुनिक प्रावधान
जैसे कि ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना, जघन्य
अपराधों की वीडियोग्राफी आदि शामिल किए गए हैं।
क्या
बदलाव आए हैं? नए कानूनों में अपराधों की परिभाषा, सजा, और
जांच प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया
को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है।
आगे
का रास्ता: इन
नए कानूनों के लागू होने से भारत की न्यायिक प्रणाली में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ
है। अब यह देखना होगा कि ये कानून जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।
भारत के नए आपराधिक कानूनों पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न
Q11. भारत ने अपने आपराधिक न्याय तंत्र में कौन से
वर्ष से एक क्रांतिकारी बदलाव किया है?
(a) 2023
(b) 2024
(c) 2025
(d) 2022
Q12. भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय
साक्ष्य अधिनियम किस वर्ष लागू हुए थे?
(a) 25 दिसंबर,
2023
(b) 12 दिसंबर,
2023
(c) 1 जुलाई,
2024
(d) इनमें से कोई नहीं
Q13. भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य
अधिनियम किस काल के अवशेष थे?
(a) मुगल काल
(b) गुप्त काल
(c) ब्रिटिश शासनकाल
(d) मौर्य काल
Q14. नए आपराधिक कानूनों में कौन से आधुनिक प्रावधान
शामिल किए गए हैं?
(a) केवल ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना
(b) केवल जघन्य अपराधों की वीडियोग्राफी
(c) ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना और जघन्य अपराधों की वीडियोग्राफी
(d) इनमें से कोई नहीं
Q15.नए कानूनों का उद्देश्य क्या है?
(a) न्याय प्रक्रिया को धीमा करना
(b) न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना
(c) अपराधों को बढ़ावा देना
(d) इनमें से कोई नहीं
A4. भारत में सामुदायिक रेडियो का विस्तार और पुरस्कार
Expansion of Community Radio in India and Awards
महत्वपूर्ण
मील का पत्थर:
भारत में 500वां सामुदायिक रेडियो स्टेशन, 'अपना रेडियो 90.0 FM', मिज़ोरम के आइजोल में शुरू हुआ।
किसानों
के लिए वरदान: यह
स्टेशन किसानों को मौसम की जानकारी, सरकारी
योजनाओं और कृषि से जुड़ी जानकारियां देगा।
10वें राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो पुरस्कार: बिहार, महाराष्ट्र, असम और केरल के रेडियो स्टेशनों को विभिन्न
श्रेणियों में पुरस्कार मिले।
मिज़ोरम
का विकास:
आइजोल, जुलाई 2025 तक
रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे
राज्य का विकास होगा।
पूर्वोत्तर
का कनेक्टिविटी:
असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश की राजधानियों के
बाद अब मिज़ोरम की राजधानी भी रेलवे से जुड़ रही है।
सामुदायिक
रेडियो का महत्व: ये
रेडियो स्टेशन स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों को बढ़ावा देते हैं और लोगों को एक
मंच प्रदान करते हैं।
अतिरिक्त जानकारी:
सामुदायिक
रेडियो क्या है? ये रेडियो स्टेशन समुदाय के लोगों द्वारा
संचालित होते हैं और स्थानीय मुद्दों और जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
सामुदायिक
रेडियो का लाभ: ये
स्टेशन सूचना का प्रसार करते हैं, लोगों
को सशक्त बनाते हैं और सामाजिक बदलाव लाने में मदद करते हैं।
भारत
में सामुदायिक रेडियो का इतिहास: भारत में सामुदायिक रेडियो का इतिहास काफी पुराना है और यह देश के
दूरदराज के इलाकों में लोगों तक पहुंचने का एक प्रभावी माध्यम साबित हुआ है।
भारत में सामुदायिक रेडियो पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न
Q16. भारत में 500वाँ
सामुदायिक रेडियो स्टेशन किस राज्य में शुरू हुआ?
(a) असम
(b) महाराष्ट्र
(c) मिज़ोरम
(d) केरल
Q17. सामुदायिक रेडियो स्टेशन किसानों को क्या
प्रदान करते हैं?
(a) केवल मनोरंजन
(b) मौसम की जानकारी, सरकारी योजनाओं और कृषि से जुड़ी जानकारियां
(c) सिर्फ खेल समाचार
(d) राजनीतिक समाचार
Q18. 10वें राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो पुरस्कार किस
राज्य के रेडियो स्टेशन को मिले हैं?
(a) केवल बिहार
(b) बिहार, महाराष्ट्र, असम और केरल
(c) केवल महाराष्ट्र और केरल
(d) केवल असम और बिहार
Answer and Explanation
Q19. मिज़ोरम की राजधानी कब तक रेलवे नेटवर्क से
जुड़ जाएगी?
(a) 2024
(b) 2025
(c) 2026
(d) 2027
Q20. सामुदायिक रेडियो का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) केवल मनोरंजन प्रदान करना
(b) समुदाय की शैक्षिक, विकासात्मक सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतों को
पूरा करना
(c) सिर्फ राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करना
(d) केवल विज्ञापन प्रसारित करना
A5. पेपर लीक रोकने के लिए यूपी सरकार का नया अध्यादेश
UP Government's New Ordinance to Curb Paper Leak
योगी
सरकार की बड़ी पहल:
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पेपर लीक और नकल माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाते
हुए अध्यादेश को मंजूरी दी है। इस अध्यादेश के तहत पेपर लीक मामलों में सख्त
कार्रवाई होगी।
अध्यादेश
में क्या है खास:
· पेपर लीक में शामिल पाए जाने पर दो साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया
है।
· दोषियों पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
पेपर लीक से सरकार की छवि को झटका: हाल ही में हुई पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं
में नाराजगी बढ़ी है और विपक्ष ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर हमला बोला है।
नई
नीति का ऐलान:
· पेपर लीक को रोकने के लिए हर पाली में 2 या उससे अधिक पेपर सेट होंगे।
-
प्रत्येक पेपर सेट की छपाई अलग-अलग एजेंसी से कराई जाएगी ताकि लीक होने की संभावना कम हो सके।
-
पेपर कोडिंग और सेंटर चयन
में भी सख्ती बरती जाएगी।
केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था:
· सभी चयन परीक्षाओं के केंद्र सीसीटीवी से लैस होंगे।
· राजकीय माध्यमिक विद्यालय, डिग्री
कॉलेज, विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक,
इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, अथवा अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले संस्थानों को ही परीक्षा केंद्र बनाया
जाएगा।
पिछली
घटनाओं से सबक:
फरवरी में हुई पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा और आरओ-एआरओ परीक्षा के पेपर लीक ने
सरकार को इस दिशा में कठोर कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
अतिरिक्त जानकारी
पेपर
लीक के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य: सरकार का उद्देश्य न केवल शिक्षा प्रणाली की शुद्धता को बनाए रखना है, बल्कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखना भी
है।
विपक्ष
की प्रतिक्रिया:
विपक्षी दलों ने पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए
हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
बहुविकल्पीय प्रश्न
Q21. योगी सरकार द्वारा पेपर लीक और नकल माफियाओं के
खिलाफ उठाए गए कदम क्या हैं?
a) पेपर लीक के दोषियों को दो साल की सजा
b) पेपर लीक के दोषियों पर एक करोड़ रुपये का
जुर्माना
c) पेपर लीक के दोषियों को उम्रकैद तक की सजा
d) उपरोक्त सभी
Q22. पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार द्वारा किस प्रकार की नई नीति अपनाई
गई है?
a) हर पाली में एक ही पेपर सेट होगा
b) हर पाली में 2 या उससे अधिक पेपर सेट होंगे
c) पेपर सेट की छपाई केवल एक एजेंसी से होगी
d) पेपर सेट की छपाई बंद कर दी जाएगी
Q23. नए अध्यादेश के अनुसार, किस प्रकार के शैक्षिक संस्थानों को चयन
परीक्षा केंद्र के रूप में चुना जाएगा?
a) निजी स्कूल
b) केवल पॉलिटेक्निक कॉलेज
c) राजकीय माध्यमिक विद्यालय, डिग्री कॉलेज, और ख्याति प्राप्त संस्थान
d) सभी प्रकार के संस्थान
Q24. पेपर लीक से सरकार की छवि पर क्या प्रभाव पड़ा?
a) सकारात्मक प्रभाव
b) युवाओं में नाराजगी और विपक्षी हमले
c) शिक्षा प्रणाली में सुधार
d) कोई प्रभाव नहीं पड़ा
Q25. पेपर लीक के खिलाफ योगी सरकार की कार्रवाई का
मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) शिक्षा प्रणाली की शुद्धता को बनाए रखना
b) युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखना
c) विपक्ष की आलोचना से बचना
d) केवल a और b
A6. सरोगेसी के लिए बड़ी राहत: अब 180 दिनों का मातृत्व अवकाश
Big Relief for Surrogacy: Now 180 Days Maternity
Leave
सरोगेसी
में बड़ा बदलाव:
भारत सरकार ने केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972 में संशोधन किया है।
मातृत्व
अवकाश में बढ़ोतरी: अब
सरोगेसी के माध्यम से मां बनने वाली महिला कर्मचारियों को 6 महीने (180
दिन) का मातृत्व अवकाश मिलेगा।
पितृत्व
अवकाश का लाभ:
कमीशनिंग पिताओं को भी 15 दिनों का पितृत्व अवकाश दिया जाएगा।
सरकारी
कर्मचारियों के लिए राहत: यह नियम सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा, चाहे वे सरोगेट मां हों या कमीशनिंग मां।
50 साल पुराने नियम में बदलाव: यह संशोधन पिछले 50 सालों से चले आ रहे नियम में एक बड़ा बदलाव
है।
चाइल्ड
केयर लीव:
पहले से ही, महिला और पुरुष सरकारी कर्मचारियों को 730 दिनों की चाइल्ड केयर लीव मिलती है।
अतिरिक्त जानकारी
सरोगेसी
क्या है:
सरोगेसी एक प्रक्रिया है जिसमें एक महिला किसी दूसरे दंपत्ति के बच्चे को जन्म
देती है।
कमीशनिंग
माता-पिता: ये
वे लोग होते हैं जो बच्चे को पालने-पोसने का जिम्मा लेते हैं।
सरोगेट
मां: यह
वह महिला होती है जो बच्चे को जन्म देती है।
संशोधन
का उद्देश्य: यह
संशोधन महिलाओं को उनके करियर और मातृत्व दोनों को संतुलित करने में मदद करेगा।
अन्य
देशों की तुलना: इस संशोधन
से भारत अन्य देशों के बराबर आ गया है जहां सरोगेसी के लिए मातृत्व अवकाश दिया
जाता है।
सरोगेसी पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न
Q26. भारत सरकार ने किस नियम में संशोधन किया है
जिसके तहत सरोगेसी के मामले में मातृत्व अवकाश में वृद्धि हुई है?
(a) केंद्रीय सिविल सेवा (सेवानिवृत्ति) नियम, 1972
(b) केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972
(c) केंद्रीय सिविल सेवा (वेतन) नियम, 1972
(d) केंद्रीय सिविल सेवा (पदोन्नति) नियम, 1972
Q27. सरोगेसी के माध्यम से मां बनने वाली महिला
कर्मचारी को कितने दिनों का मातृत्व अवकाश मिलेगा?
(a) 90 दिन
(b) 120 दिन
(c) 180 दिन
(d) 240 दिन
Q28. कमीशनिंग पिता को कितने दिनों का पितृत्व अवकाश
दिया जाएगा?
(a) 7 दिन
(b) 10 दिन
(c) 15 दिन
(d) 20 दिन
Q29. सरोगेसी में 'कमीशनिंग माता-पिता' किसे
कहा जाता है?
(a) जो महिला बच्चे को जन्म देती है
(b) जो दंपत्ति बच्चे को पालने-पोसने का जिम्मा
लेता है
(c) जो एजेंसी सरोगेसी प्रक्रिया को संचालित करती
है
(d) जो डॉक्टर सरोगेसी प्रक्रिया में शामिल होता है
Q30. सरोगेसी के लिए मातृत्व अवकाश में वृद्धि करने
का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(a) सरोगेसी को बढ़ावा देना
(b) महिलाओं को करियर और मातृत्व दोनों को संतुलित
करने में मदद करना
(c) पुरुषों को अधिक पितृत्व अवकाश लेने के लिए
प्रोत्साहित करना
(d) सरकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना
Other Current Affairs Questions
Q31. भारत ने हाल ही में किस देश के साथ UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) सेवा शुरू करने के
लिए समझौता किया है?
(a) मालदीव
(b) श्रीलंका
(c) नेपाल
(d) भूटान
Q32. विश्व हाथी दिवस प्रतिवर्ष किस महीने में मनाया
जाता है?
(a) जुलाई
(b) अगस्त
(b) सितंबर
(d) अक्टूबर
Q33. पेरिस ओलंपिक 2024 के समापन समारोह में भारत के ध्वजवाहक कौन थे?
(a) नीरज चोपड़ा और मनु भाकर
(b) मनु भाकर और पीआर श्रीजेश
(c) पीआर श्रीजेश और नीरज चोपड़ा
(d) इनमें से कोई नहीं
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