24 August 2025 Current Affairs Questions
हैलो दोस्तों !
आज हम current affairs के इन बिंदुओं पर गहराई से विचार करेंगे और उम्मीद करेंगे कि आप इन बिंदुओं को लंबे समय तक याद रखने के लिए हमारे साथ 30 से अधिक प्रश्नों की क्विज जरूर खेलेंगे. दी गई घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न नीचे दिए गए हैं।
- A1. बेंगलुरु में 'ऑपरेशन अभ्यास': आपातकाल से लड़ने की तैयारी
- A2. तीस्ता प्रहार: जल और थल पर भारतीय सेना की शक्ति
- A3. केयरएज रेटिंग्स: भारत के राज्यों का मूल्यांकन
- A4. भारत बनेगा दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
- A5. गाजा में इज़रायल का नया प्लान: ऑपरेशन 'गिदियोन्स चैरियट्स'
- A6. आईएमएफ की रिपोर्ट: वैश्विक ऋण का बढ़ता बोझ
आप प्रतिदिन हमारी वेबसाइट SelfStudy Meter पर 30 करंट अफेयर प्रश्नों को पढ़ सकते हैं और अगले दिन सुबह 7:00 बजे इन पढ़े हुए प्रश्नों की क्विज खेल सकते हैं हमारे YouTube channel - Mission: CAGS पर, जबकि प्रतिदिन 45 से अधिक करंट अफेयर प्रश्नों की क्विज खेलने के लिए व pdf डाउनलोड करने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो कर सकते हैं ।
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Quiz time on Telegram is 7:30 p.m
क्विज खेलने के फायदे:
क्विज खेलने से आपकी रीडिंग स्किल इंप्रूव होगी, लर्निंग स्किल बढ़ेगी और आप अपनी तैयारी का स्वमूल्यांकन कर सकेंगे मतलब आप अपना याद किया हुआ चेक कर सकेंगे कि आपके द्वारा पढ़ा हुआ आपको कितना याद है?क्विज खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी तैयारी को एक दिशा दे पाएंगे।
A1.
बेंगलुरु में
'ऑपरेशन अभ्यास': आपातकाल से लड़ने की तैयारी
Bengaluru's
'Operation Abhyas': Gearing Up for Emergencies
गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश
पर, बेंगलुरु में 'ऑपरेशन अभ्यास' नामक एक राष्ट्रव्यापी सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित
की गई। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जनता में आपातकालीन स्थितियों के प्रति जागरूकता
बढ़ाना और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मज़बूत करना था।
इस मॉक ड्रिल का आयोजन कर्नाटक
राज्य अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग द्वारा किया गया था। इस दौरान आग लगने, मलबे
में फंसे लोगों को बचाने और ऊंची इमारतों से सुरक्षित बाहर निकालने जैसे विभिन्न आपातकालीन
परिदृश्यों का अभ्यास किया गया। इस अभ्यास ने बचाव और प्राथमिक चिकित्सा कार्यों की
प्रभावशीलता का परीक्षण किया।
'ऑपरेशन अभ्यास' जैसे मॉक ड्रिल
वास्तविक जीवन की आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक कौशल और समन्वय को बेहतर बनाने में
मदद करते हैं। ये अभ्यास विभिन्न सरकारी एजेंसियों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के
बीच सहयोग स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति
में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके।
अतिरिक्त जानकारी
नागरिक सुरक्षा (Civil
Defence): नागरिक सुरक्षा का उद्देश्य आपदाओं और आपात स्थितियों के दौरान आम नागरिकों
की जान-माल की रक्षा करना है। इसमें बचाव, राहत और पुनर्वास कार्य शामिल होते हैं।
मॉक ड्रिल (Mock Drill): यह किसी
भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए किया जाने वाला एक नकली अभ्यास है। इसका उद्देश्य
वास्तविक घटना से पहले तैयारियों का आकलन करना, कमियों की पहचान करना और प्रतिक्रिया
टीम के सदस्यों को प्रशिक्षित करना है।
आपदा प्रबंधन (Disaster
Management): इसमें आपदा से पहले, उसके दौरान और बाद में की जाने वाली सभी गतिविधियां
शामिल होती हैं। इसका लक्ष्य आपदाओं के प्रभाव को कम करना और प्रभावित क्षेत्रों में
जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना है।
मॉक ड्रिल का आयोजन केवल आपदाओं
के लिए ही नहीं, बल्कि आतंकवादी हमलों या अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारी के
लिए भी किया जाता है।
भारत में आपदा प्रबंधन के लिए
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) शीर्ष निकाय है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री
करते हैं।
A2.
तीस्ता प्रहार: जल और थल पर भारतीय सेना की शक्ति
English:
Teesta Prahar: The Might of the Indian Army on Land and Water
भारतीय सेना ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के तीस्ता फील्ड फायरिंग रेंज में एक बड़ा और महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास 'तीस्ता प्रहार' सफलतापूर्वक संपन्न किया। पूर्वी कमान के तहत आने वाली भारतीय सेना की शक्तिशाली त्रिशक्ति कोर द्वारा आयोजित यह अभ्यास, सैनिकों को चुनौतीपूर्ण नदी और हर तरह के भू-भाग वाले वातावरण में युद्ध करने के लिए तैयार करता है।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों का अनुभव करना और यह सुनिश्चित करना है कि हमारी सेना किसी भी परिस्थिति में दुश्मन का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसमें नदी पार करने, जल-थल दोनों में कार्रवाई करने और हवाई हमलों का जवाब देने जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल थे।
यह अभ्यास इसलिए भी खास है क्योंकि यह सैनिकों को न केवल पारंपरिक युद्ध तकनीकों में माहिर बनाता है, बल्कि उन्हें आधुनिक और जटिल युद्धकला के लिए भी तैयार करता है। तीस्ता नदी के आसपास का क्षेत्र अपनी भौगोलिक विविधता के लिए जाना जाता है, जो इस तरह के अभ्यासों के लिए एक आदर्श स्थान है।
अतिरिक्त जानकारी
त्रिशक्ति कोर (Trishakti Corps): भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में है और यह पूर्वी कमान के तहत काम करती है। यह कोर विशेष रूप से सिक्किम और उत्तरी बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है।
रणनीतिक महत्व: तीस्ता नदी और उसके आसपास का क्षेत्र भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चीन और भूटान के साथ सीमा के करीब है। यहाँ होने वाले सैन्य अभ्यास इस क्षेत्र में भारत की सैन्य उपस्थिति और तैयारियों को मजबूत करते हैं।
तीस्ता दी: यह नदी सिक्किम से निकलती है और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। यह अपने तेज बहाव और बदलती धाराओं के लिए जानी जाती है, जो इसे सैन्य अभ्यासों के लिए एक चुनौतीपूर्ण और यथार्थवादी स्थान बनाती है।
A3.
केयरएज रेटिंग्स: भारत के राज्यों का मूल्यांकन
CareEdge
Ratings: India's Top Performing States
केयरएज रेटिंग्स की हालिया स्टेट रैंकिंग 2025 ने भारत के राज्यों की आर्थिक और विकासात्मक प्रगति को उजागर किया है। यह रिपोर्ट न केवल राज्यों की मौजूदा स्थिति बताती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वे किन क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस वर्ष, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया है।
मुख्य बिंदु:
ग्रुप 'ए' (बड़े राज्य):
महाराष्ट्र ने 56.5 के समग्र स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया।
गुजरात 52.4 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
कर्नाटक 51.9 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
यह रैंकिंग दर्शाती है कि ये राज्य आर्थिक, बुनियादी ढाँचा और वित्तीय विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत हैं।
ग्रुप 'बी' (पूर्वोत्तर, पहाड़ी और छोटे राज्य):
गोवा ने 62.1 के प्रभावशाली स्कोर के साथ इस समूह में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
जानें इस रैंकिंग के बारे में:
यह वार्षिक रैंकिंग का दूसरा संस्करण है। यह 50 अलग-अलग संकेतकों (Indicators) का उपयोग करके राज्यों का मूल्यांकन करती है, जिन्हें सात प्रमुख स्तंभों (Pillars) में बांटा गया है:
1. आर्थिक (Economic)
2. राजकोषीय (Fiscal)
3. बुनियादी ढाँचा (Infrastructure)
4. वित्तीय विकास (Financial Development)
5. सामाजिक (Social)
6. शासन (Governance)
7. पर्यावरण (Environmental)
यह रैंकिंग राज्यों को अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने में मदद करती है, जिससे वे भविष्य के लिए बेहतर नीतियाँ बना सकें।
अतिरिक्त जानकारी (Additional Information)
केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) भारत की एक प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है। यह विभिन्न कंपनियों और राज्यों की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करती है और निवेशकों को निर्णय लेने में मदद करती है। ऐसी रेटिंग एजेंसियां अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि वे पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाती हैं।
सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) किसी राज्य की अर्थव्यवस्था को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है। महाराष्ट्र भारत की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था है, जिसके बाद तमिलनाडु और गुजरात का स्थान आता है।
यह दिलचस्प है कि कई राज्यों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है, जो बताता है कि भारत में राज्यों के बीच विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा चल रही है।
इस तरह की रैंकिंग्स सरकारी योजनाओं और नीतियों के प्रभाव को समझने में भी मदद करती हैं, जैसे 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' (Ease of Doing Business) या अन्य सुधारों का जमीनी स्तर पर क्या असर हो रहा है।
भारत में लगभग हर साल एक नए राज्य का निर्माण हुआ है। 1947 में भारत में 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश थे। आज, हमारे पास 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं।
A4.
भारत बनेगा दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
India
on Track to Become 4th Largest Economy
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल करने जा रही है। अनुमान है कि भारत वर्ष 2025 में जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
आर्थिक वृद्धि के मुख्य आंकड़े:
2025 में अनुमानित GDP:
भारत का नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (Nominal GDP) $4,187.02 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
यह जापान के $4,186.43 बिलियन के GDP से थोड़ा अधिक होगा।
तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था:
अगले दो वर्षों में भारत की वृद्धि दर 6% से अधिक रहने की संभावना है, जो इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाएगा।
भारत की अनुमानित आर्थिक वृद्धि दर चीन (4%), अमेरिका (1.8%), जापान (0.6%) और ब्रिटेन (1.1%) से भी अधिक है।
2028 तक का लक्ष्य:
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2028 तक भारत की GDP बढ़कर $5,584.48 बिलियन हो जाएगी।
इससे भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
वर्तमान वैश्विक रैंकिंग:
1. संयुक्त राज्य अमेरिका: $30,507.22 बिलियन के अनुमानित GDP के साथ पहले स्थान पर है।
2. चीन: $19,231.71 बिलियन के GDP के साथ दूसरे स्थान पर है।
यह रिपोर्ट भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक मंच पर उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
अतिरिक्त जानकारी (Additional Information)
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की आर्थिक स्थिति को मापने का सबसे सामान्य तरीका है। यह एक निश्चित अवधि में देश के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक या बाजार मूल्य है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एक वैश्विक वित्तीय संस्था है जो दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर नज़र रखती है, आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देती है और अपने सदस्य देशों को वित्तीय सहायता और सलाह प्रदान करती है।
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख कारण उसकी विशाल और युवा आबादी है, जो उपभोग और उत्पादन दोनों को बढ़ावा देती है।
यह अनुमानित वृद्धि भारत की मजबूत घरेलू मांग, सरकारी सुधारों और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश को दर्शाती है।
आजादी के समय, भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत छोटी थी और कृषि पर अत्यधिक निर्भर थी। पिछले कुछ दशकों में, देश ने सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में तेजी से विकास किया है, जो आज इसकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालक हैं।
किसी भी देश की GDP दो तरह से मापी जाती है: नाममात्र (Nominal) GDP और वास्तविक (Real) GDP। नाममात्र GDP वर्तमान बाजार कीमतों पर मापा जाता है, जबकि वास्तविक GDP मुद्रास्फीति को समायोजित करके मापा जाता है, जो समय के साथ आर्थिक उत्पादन में वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है।
1991 के आर्थिक उदारीकरण (Economic Liberalization) के बाद से भारत ने एक लंबी आर्थिक छलांग लगाई है, जिसने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकृत होने का अवसर दिया।
A5.
गाजा में इज़रायल का नया प्लान: ऑपरेशन 'गिदियोन्स चैरियट्स'
Operation
'Gideon's Chariots': Israel's New Strategy in Gaza
इज़रायल और हमास के बीच जारी संघर्ष एक नए और विवादास्पद चरण में प्रवेश कर गया है। 6 मई, 2025 को, इज़रायल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने ऑपरेशन 'गिदियोन्स चैरियट्स' की घोषणा की। इस ऑपरेशन को इज़रायली सुरक्षा कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इसका मुख्य लक्ष्य गाजा पट्टी पर कब्ज़ा करना और वहाँ के क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में लेना है।
इज़रायली सरकार के एक मंत्री के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई से गाजा पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। उनका यह भी मानना है कि इस जीत के बाद बड़ी संख्या में फ़िलिस्तीनी आबादी "तीसरे देशों में चली जाएगी"। इस तरह की घोषणाओं ने जातीय सफ़ाई की आशंकाओं को बढ़ा दिया है, जिसने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चिंता पैदा कर दी है।
मुख्य बिंदु
ऑपरेशन का नाम: 'गिदियोन्स चैरियट्स'
घोषणा: 6 मई, 2025 को इज़रायल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच द्वारा की गई।
उद्देश्य: गाजा पट्टी पर कब्ज़ा करना और उस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करना।
विवादास्पद परिणाम: इस ऑपरेशन से गाजा के पूरी तरह से नष्ट होने और फ़िलिस्तीनी आबादी के बड़े पैमाने पर विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।
अतिरिक्त जानकारी
‘गिदियोन्स चैरियट्स’ का ऐतिहासिक संदर्भ: 'गिदियोन' बाइबिल के एक न्यायाधीश थे जो अपने साहस और छोटे सैनिकों के समूह के साथ बड़ी जीत के लिए जाने जाते हैं। इस नाम का उपयोग ऑपरेशन के लिए करना इज़रायली सेना के लिए एक प्रतीकात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रेरणा हो सकती है, जो यह दर्शाता है कि वे अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय कानून: यदि यह ऑपरेशन बड़े पैमाने पर नागरिक आबादी के विस्थापन का कारण बनता है, तो इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है। जेनेवा कन्वेंशन नागरिक आबादी को सुरक्षित रखने पर जोर देता है।
फ़िलिस्तीनी विस्थापन (नकबा): 1948 में इज़रायल के गठन के दौरान भी बड़ी संख्या में फ़िलिस्तीनियों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा था, जिसे वे "नकबा" (विनाश या त्रासदी) कहते हैं। ऑपरेशन 'गिदियोन्स चैरियट्स' की घोषणा ने इन पुरानी यादों को ताज़ा कर दिया है और भविष्य में एक और बड़ी त्रासदी की आशंका को बढ़ा दिया है।
वर्तमान में गाजा दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है, जहाँ 20 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं। इस ऑपरेशन के परिणामस्वरूप लाखों लोग बेघर हो सकते हैं, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
A6.
आईएमएफ की रिपोर्ट: वैश्विक ऋण का बढ़ता बोझ
IMF
Report: The Growing Burden of Global Debt
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2025 की 'फिस्कल मॉनिटर' रिपोर्ट ने एक बार फिर दुनिया भर की सरकारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक सार्वजनिक ऋण-से-जीडीपी अनुपात (Global Public Debt-to-GDP
Ratio) एक बार फिर खतरनाक स्तरों के करीब पहुँच रहा है। इसका मतलब है कि देशों पर उनकी आर्थिक क्षमता (जीडीपी) की तुलना में कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जो भविष्य में आर्थिक स्थिरता के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
इस रिपोर्ट के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:
सूडान, जापान को पछाड़कर शीर्ष पर: 2025 में, सूडान दुनिया का सबसे अधिक ऋण-से-जीडीपी अनुपात वाला देश बन गया है, जिसने लंबे समय तक शीर्ष पर रहे जापान को भी पीछे छोड़ दिया है। यह सूडान की कमजोर आर्थिक स्थिति और राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाता है।
चीन और भारत की स्थिति: इस रिपोर्ट में चीन 21वें स्थान पर है, जिसका सार्वजनिक ऋण अनुपात 96% है। वहीं, भारत 31वें स्थान पर है, जो वैश्विक औसत से काफी बेहतर स्थिति में है।
यह रिपोर्ट बताती है कि भले ही महामारी के बाद ऋण का बोझ कम हुआ था, लेकिन अब यह फिर से बढ़ रहा है। विभिन्न देशों की सरकारों को इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए सावधानीपूर्वक वित्तीय नीतियां अपनाने की आवश्यकता है।
अतिरिक्त जानकारी
ऋण-से-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio): यह किसी देश के कुल सरकारी ऋण (National Debt) की तुलना उसकी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से करता है। इसे प्रतिशत में मापा जाता है। एक उच्च अनुपात यह संकेत देता है कि देश अपनी अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में अधिक कर्ज में है, जिससे ऋण चुकाना मुश्किल हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी देश का ऋण-से-जीडीपी अनुपात 100% है, तो इसका मतलब है कि उसका कुल ऋण उसकी एक साल की कुल आर्थिक पैदावार के बराबर है।
आईएमएफ की 'फिस्कल मॉनिटर' रिपोर्ट एक अर्ध-वार्षिक (Half-yearly) प्रकाशन है, जो दुनिया भर में राजकोषीय (Fiscal) विकास और प्रवृत्तियों का विश्लेषण करती है। यह सरकारों को उनकी राजकोषीय नीतियों की समीक्षा करने और बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है।
कुछ लोगों का मानना है कि उच्च ऋण-से-जीडीपी अनुपात हमेशा बुरा नहीं होता। जापान जैसे देश दशकों से उच्च ऋण अनुपात के साथ भी अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए हुए हैं। हालांकि, विकासशील देशों के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है।
वैश्विक वित्तीय संकट (2008) और कोविड-19 महामारी के दौरान, कई देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देने के लिए भारी कर्ज लेना पड़ा, जिसके कारण वैश्विक ऋण में तेज़ी से वृद्धि हुई थी।
सूडान का अत्यधिक ऋण अनुपात उसके आंतरिक संघर्षों, राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर आर्थिक प्रबंधन का परिणाम है। यह दिखाता है कि एक देश के लिए केवल आर्थिक नीतियां ही नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता भी कितनी महत्वपूर्ण होती है।
जापान में दशकों से उच्च ऋण अनुपात के बावजूद, वहां के ऋण का अधिकांश हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास है, जिससे बाहरी जोखिम कम होता है।
उपरोक्त घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न के लिए यहां क्लिक करें ।
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