17 August 2025 Current Affairs Questions
हैलो दोस्तों !
आज हम current affairs के इन बिंदुओं पर गहराई से विचार करेंगे और उम्मीद करेंगे कि आप इन बिंदुओं को लंबे समय तक याद रखने के लिए हमारे साथ 30 से अधिक प्रश्नों की क्विज जरूर खेलेंगे. दी गई घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न नीचे दिए गए हैं।
- A1. क्रिकेट से फ़ुटबॉल तक: ट्रांसजेंडर एथलीटों के लिए यूके में बदल रहे हैं नियम
- A2. सूडान पर रासायनिक हथियारों के प्रयोग पर अमेरिकी प्रतिबंध
- A3. त्रिशूर पूरम: केरल का सबसे भव्य उत्सव
- A4. LIMA 2025: भारत-मलेशिया रक्षा संबंध
- A5. सरस्वती पुष्करलु: त्रिवेणी संगम का महाकुंभ
- A6. आस्था, ज्योतिष और नदियों का महासंगम: पुष्कर कुंभ
आप प्रतिदिन हमारी वेबसाइट SelfStudy Meter पर 30 करंट अफेयर प्रश्नों को पढ़ सकते हैं और अगले दिन सुबह 7:00 बजे इन पढ़े हुए प्रश्नों की क्विज खेल सकते हैं हमारे YouTube channel - Mission: CAGS पर, जबकि प्रतिदिन 45 से अधिक करंट अफेयर प्रश्नों की क्विज खेलने के लिए व pdf डाउनलोड करने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो कर सकते हैं ।
Our Telegram channel - Mission: CAGS
Quiz time on Telegram is 7:30 p.m
क्विज खेलने के फायदे:
क्विज खेलने से आपकी रीडिंग स्किल इंप्रूव होगी, लर्निंग स्किल बढ़ेगी और आप अपनी तैयारी का स्वमूल्यांकन कर सकेंगे मतलब आप अपना याद किया हुआ चेक कर सकेंगे कि आपके द्वारा पढ़ा हुआ आपको कितना याद है?क्विज खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी तैयारी को एक दिशा दे पाएंगे।
A1.
क्रिकेट से फ़ुटबॉल तक: ट्रांसजेंडर एथलीटों के लिए यूके में बदल रहे हैं नियम
From
Cricket to Football: UK's Changing Rules for Transgender Athletes
हाल ही में इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद निर्णय लिया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि अब से इंग्लैंड और वेल्स में महिला और लड़कियों के क्रिकेट के सभी स्तरों में ट्रांसजेंडर महिलाएँ भाग नहीं ले पाएँगी। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
यह निर्णय केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। इंग्लिश फुटबॉल एसोसिएशन (FA) ने भी इसी तरह की घोषणा की है, जिसमें ट्रांसजेंडर महिलाओं को फुटबॉल टूर्नामेंट के लिए अयोग्य ठहराया गया है। आइए समझते हैं कि इस फैसले के पीछे क्या कारण हैं और इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्य बातें:
ईसीबी का ऐतिहासिक निर्णय: इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला क्रिकेट से बाहर करने का फैसला किया है। यह नीति महिला और लड़कियों के क्रिकेट के सभी स्तरों पर लागू होगी।
कानूनी आधार: यह नीति परिवर्तन यूके सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के जवाब में आया है। कोर्ट ने कानूनी रूप से "महिला" को जैविक लिंग के आधार पर परिभाषित किया था। इस फैसले ने खेल निकायों को अपनी नीतियों की समीक्षा करने के लिए प्रेरित किया।
वैज्ञानिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: ईसीबी और अन्य खेल निकायों का मानना है कि जैविक रूप से पुरुषों में किशोरावस्था के बाद कुछ शारीरिक लाभ होते हैं, जैसे कि हड्डियों का घनत्व, मांसपेशियों की ताकत और फेफड़ों की क्षमता। ये लाभ प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित खेल के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। यह निर्णय मुख्य रूप से निष्पक्षता और महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
अन्य खेलों पर प्रभाव: यह सिर्फ़ क्रिकेट और फुटबॉल तक सीमित नहीं है। इस तरह के फैसलों का असर भविष्य में अन्य खेलों और खेल संघों की नीतियों पर भी पड़ सकता है। दुनिया भर में खेल निकाय ट्रांसजेंडर एथलीटों की भागीदारी को लेकर बहस कर रहे हैं और नई नीतियाँ बना रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य: यह मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और अन्य वैश्विक खेल महासंघों के लिए भी एक चुनौती बना हुआ है। कई खेल संस्थाएँ अभी भी इस विषय पर अलग-अलग नीतियाँ अपना रही हैं, जिससे एकरूपता की कमी है।
A2.
सूडान पर रासायनिक हथियारों के प्रयोग पर अमेरिकी प्रतिबंध
US
Sanctions on Sudan for Chemical Weapons Use
सूडान में चल रहे गृह युद्ध के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सूडान पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका ने यह औपचारिक रूप से निर्धारित किया है कि सूडान ने 2024 से चल रहे गृह युद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है।
मुख्य बिंदु:
रासायनिक हथियारों का प्रयोग: अमेरिका ने इस बात की पुष्टि की है कि सूडान में गृह युद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों का उपयोग हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
अमेरिकी विदेश विभाग की घोषणा: अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टैमी बूस ने यह घोषणा की कि अमेरिका ने सूडान द्वारा रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को समाप्त कर दिया है, और इसके बाद 6 जून से प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
प्रतिबंधों का स्वरूप: इन प्रतिबंधों में सूडान को अमेरिका से निर्यात होने वाले सामानों पर रोक और सरकार समर्थित ऋण तक पहुँच को सीमित करना शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय कानून: रासायनिक हथियारों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले कई अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और समझौते हैं, जैसे कि रासायनिक हथियार कन्वेंशन (Chemical Weapons
Convention - CWC)। यह कन्वेंशन रासायनिक हथियारों के विकास, उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर रोक लगाता है।
मानवीय संकट: सूडान का गृह युद्ध पहले से ही एक गंभीर मानवीय संकट का कारण बना हुआ है। रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल इस संकट को और भी बढ़ा सकता है, जिससे आम नागरिकों के जीवन को खतरा होता है।
A3.
त्रिशूर पूरम:
केरल का सबसे भव्य उत्सव
Thrissur
Pooram: Kerala's Grandest Festival
केरल, जिसे 'ईश्वर का अपना देश' कहा जाता है, अपने जीवंत और रंगीन त्योहारों के लिए प्रसिद्ध है। इन सभी में, त्रिशूर पूरम को सबसे शानदार और भव्य माना जाता है। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं है, बल्कि संस्कृति, धर्म और कला का एक अद्भुत संगम है जो हर साल हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
यह उत्सव त्रिशूर के प्रसिद्ध वड़क्कुनाथन मंदिर में मनाया जाता है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर न केवल एक पवित्र स्थान है बल्कि त्रिशूर पूरम का केंद्र भी है।
उत्सव के बारे में कुछ रोचक बातें:
समय: यह उत्सव मलयालम महीने 'मेडम' में 'पूरम' नक्षत्र के दिन मनाया जाता है।
अवधि: यह उत्सव कई दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत 'कोडियेट्टम' (झंडा फहराने की रस्म) के साथ होती है।
प्रमुख आकर्षण:
हाथियों की परेड: सजे-धजे हाथियों की शानदार परेड त्रिशूर पूरम का मुख्य आकर्षण है। यह देखने लायक होता है।
कुडामट्टम: यह दो टीमों के बीच रंगीन छतरियों का एक अद्भुत प्रदर्शन है, जो एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। यह एक बहुत ही मनोरंजक और देखने लायक हिस्सा है।
इलांजीथारा मेलम: मंदिर के इलांजी पेड़ के नीचे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की एक शानदार प्रस्तुति होती है।
भव्य आतिशबाजी: उत्सव का समापन रात में शानदार आतिशबाजी के साथ होता है, जो आसमान को रंगीन रोशनी से भर देती है।
प्रमुख मंदिर: वड़क्कुनाथन मंदिर के अलावा, त्रिशूर पूरम में आसपास के 10 मंदिरों के देवताओं को भी लाया जाता है, जो इस उत्सव को और भी खास बनाता है।
अतिरिक्त जानकारी:
इतिहास: त्रिशूर पूरम की शुरुआत कोचीन के तत्कालीन महाराजा, सक्तन थंपुरान ने 18वीं शताब्दी के अंत में की थी। उन्होंने विभिन्न छोटे मंदिरों को एकजुट करके एक बड़े उत्सव का रूप दिया था।
सांस्कृतिक महत्व: यह उत्सव केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह केरल की संस्कृति, कला और सामुदायिक एकता का प्रतीक है।
वर्ष
2025 में त्रिशूर पूरम
वर्ष
2025 में, त्रिशूर पूरम 6 मई को मनाया गया था।
उत्सव की शुरुआत 30 अप्रैल को 'कोडियेट्टम' (झंडा फहराने) की रस्म के साथ हुई थी।
A4.
LIMA
2025: भारत-मलेशिया रक्षा संबंध
LIMA
2025: India-Malaysia Defense Ties
मलेशिया के लैंगकावी में आयोजित लैंगकावी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री और एयरोस्पेस प्रदर्शनी (LIMA 2025) में भारत की भागीदारी ने द्विपक्षीय संबंधों और रक्षा कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। यह प्रदर्शनी, जो 20 मई से 24 मई, 2025 तक चली, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित रक्षा प्रदर्शनियों में से एक है।
मुख्य बिंदु:
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व: केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने इस महत्वपूर्ण आयोजन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। यह भारत की मलेशिया के साथ मजबूत रक्षा और रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
LIMA का महत्व: 1991 में स्थापित और द्विवार्षिक रूप से आयोजित होने वाली LIMA, समुद्री और एयरोस्पेस क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकों और नवाचारों को प्रदर्शित करने वाला एक प्रमुख मंच है। यह रक्षा उद्योग के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाता है, जिससे सहयोग और व्यापार के नए अवसर पैदा होते हैं।
भारत की भागीदारी का उद्देश्य:
भारतीय रक्षा उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करना।
'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों को बढ़ावा देना।
अन्य देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करना, विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशिया में।
वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करना।
अतिरिक्त जानकारी:
LIMA 2025 में भारतीय नौसेना, वायु सेना और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के नवीनतम उत्पादों और क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया।
इस आयोजन के दौरान, भारतीय और मलेशियाई अधिकारियों के बीच द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं, जिनमें रक्षा सहयोग और सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की गई।
LIMA जैसे मंच भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। यह भारत को न केवल एक आयातक बल्कि एक विश्वसनीय रक्षा निर्यातक के रूप में भी स्थापित करता है।
A5.
सरस्वती पुष्करलु: त्रिवेणी संगम का महाकुंभ
Honoring
the Goddess of Knowledge: Saraswati Pushkaralu
भारत में त्योहारों की एक लंबी परंपरा है, और इनमें से कुछ त्योहार 12 साल में एक बार आते हैं, जिनका इंतजार भक्तों को बेसब्री से होता है। ऐसा ही एक पावन और भव्य त्योहार है, सरस्वती पुष्करलु महोत्सव। यह उत्सव ज्ञान की देवी, मां सरस्वती को समर्पित है, और इसका आयोजन तेलंगाना में बड़े ही उत्साह के साथ किया जाता है। आइए, इस अद्भुत महोत्सव के बारे में कुछ रोचक बातें जानें:
आरंभ और स्थान: यह 12 दिवसीय भव्य महोत्सव 15 मई, 2025 को तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली जिले में स्थित श्री कालेश्वर श्री मुक्तेश्वर स्वामी मंदिर में शुरू हुआ है। यह मंदिर 'त्रिलिंग क्षेत्रम' के नाम से भी जाना जाता है।
त्रिवेणी संगम का महत्व: इस उत्सव का मुख्य केंद्र कालेश्वरम में स्थित 'त्रिवेणी संगमम' है। यहां गोदावरी (गोदावरी) और प्राणहिता (प्राणहिता) नदियों के साथ-साथ भूमिगत सरस्वती नदी का भी मिलन होता है। यह एक दुर्लभ और पवित्र संगम है, जहां इन तीनों नदियों का मिलन होता है।
12 वर्षों में एक बार: यह महोत्सव हर 12 साल में एक बार मनाया जाता है। इसका आयोजन उस समय होता है जब बृहस्पति (गुरु ग्रह) कुंभ राशि में प्रवेश करता है। यह समय ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है और इसलिए इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है।
क्या है पुष्करलु? 'पुष्करलु' एक प्राचीन भारतीय परंपरा है, जिसमें भारत की 12 प्रमुख नदियों में से प्रत्येक नदी की 12 वर्षों में एक बार पूजा की जाती है। प्रत्येक नदी का अपना एक विशिष्ट पुष्करम (पुष्करम) होता है, और यह बृहस्पति की राशि के अनुसार निर्धारित होता है। इस वर्ष, सरस्वती नदी का पुष्करलु मनाया जा रहा है, जो ज्ञान और विद्या के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
अनुष्ठान और मान्यताएं: इस महोत्सव के दौरान, श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान करते हैं, जिससे यह माना जाता है कि उनके पाप धुल जाते हैं और उन्हें मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्नान के बाद, भक्त पूजा-अर्चना करते हैं और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। यह उत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और आस्था का भी एक सुंदर संगम है।
A6.
आस्था, ज्योतिष और नदियों का महासंगम: पुष्कर कुंभ
A
Confluence of Faith, Astrology, and Rivers: The Kumbh Mela
क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा कुंभ भी है जो हर 12 साल में आयोजित होता है और इसका संबंध उत्तराखंड की बर्फीली वादियों से है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं 'पुष्कर कुंभ' की, जो अपनी तरह का एक अनूठा और दुर्लभ आयोजन है। हाल ही में उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गाँव के केशव प्रयाग में 12 साल के लंबे इंतजार के बाद इसका आयोजन किया गया था। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ अलकनंदा और सरस्वती नदियों का संगम होता है।
दुर्लभ खगोलीय घटना: पुष्कर कुंभ का आयोजन एक विशेष खगोलीय घटना से जुड़ा है। यह तब होता है जब बृहस्पति ग्रह 'मीन' राशि में प्रवेश करता है। इसे ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह आयोजन 14 मई से 26 मई तक किया गया था।
प्राचीन परंपराओं से संबंध: यह कुंभ प्राचीन वैष्णव परंपराओं का हिस्सा है। केशव प्रयाग में हर 12 साल में आयोजित होने वाला यह मेला महर्षि वेदव्यास, रामानुजाचार्य और माधवाचार्य जैसे महान संतों से जुड़ा है, जो इसकी आध्यात्मिक महत्ता को और भी बढ़ा देता है।
चार मुख्य कुंभ स्थल: भारत में कुंभ मेले का आयोजन चार प्रमुख स्थानों पर किया जाता है। ये सभी स्थल पवित्र नदियों के तट पर स्थित हैं:
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर।
हरिद्वार (उत्तराखंड): गंगा नदी के तट पर।
नासिक (महाराष्ट्र): गोदावरी नदी के तट पर।
उज्जैन (मध्य प्रदेश): क्षिप्रा नदी के तट पर।
कुंभ और अर्धकुंभ: कुंभ मेला हर 12 साल में बारी-बारी से इन चारों स्थानों पर आयोजित होता है। वहीं, अर्धकुंभ का आयोजन प्रयागराज और हरिद्वार में हर 6 साल में होता है।
हाल के और आगामी कुंभ:
हाल ही में प्रयागराज में महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित किया गया था।
अगला कुंभ मेला 2027 में नासिक में होगा।
इसके बाद 2028 में उज्जैन में इसका आयोजन होगा।
प्रयागराज में अगला अर्धकुंभ 2030 में आयोजित किया जाएगा।
अतिरिक्त जानकारी:
'कुंभ' का अर्थ: संस्कृत में 'कुंभ' का अर्थ 'घड़ा' है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन के दौरान अमृत से भरा एक घड़ा (कुंभ) निकला था। अमृत की कुछ बूँदें उन चार स्थानों पर गिरी थीं जहाँ कुंभ मेले का आयोजन होता है, और यही इन मेलों की शुरुआत का कारण माना जाता है।
महाकुंभ: प्रयागराज में 12 साल में एक बार आयोजित होने वाले कुंभ को 'महाकुंभ' कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है, जहाँ करोड़ों श्रद्धालु एक साथ जुटते हैं।
उपरोक्त घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न के लिए यहां क्लिक करें ।
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