2 August 2025 Current Affairs Questions
हैलो दोस्तों !
आज हम current affairs के इन बिंदुओं पर गहराई से विचार करेंगे और उम्मीद करेंगे कि आप इन बिंदुओं को लंबे समय तक याद रखने के लिए हमारे साथ 30 से अधिक प्रश्नों की क्विज जरूर खेलेंगे. दी गई घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न नीचे दिए गए हैं।
- A1. इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर: कौशल विकास का नया अध्याय
- A2. भारत की क्वांटम क्रांति: सुरक्षा और कंप्यूटिंग में नई ऊँचाई
- A3. जापान का कमाल: दुनिया का पहला 3D-प्रिंटेड रेलवे स्टेशन
- A4. समुद्री दुनिया में एक नया अध्याय: वैश्विक कार्बन टैक्स
- A5. सौर शक्ति का नया साथी: मॉरीशस और ISA
- A6. ओटावा कन्वेंशन: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा की नई चुनौतियाँ
आप प्रतिदिन हमारी वेबसाइट SelfStudy Meter पर 30 करंट अफेयर प्रश्नों को पढ़ सकते हैं और अगले दिन सुबह 7:00 बजे इन पढ़े हुए प्रश्नों की क्विज खेल सकते हैं हमारे YouTube channel - Mission: CAGS पर, जबकि प्रतिदिन 45 से अधिक करंट अफेयर प्रश्नों की क्विज खेलने के लिए व pdf डाउनलोड करने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो कर सकते हैं ।
Our Telegram channel - Mission: CAGS
Quiz time on Telegram is 7:30 p.m
क्विज खेलने के फायदे:
क्विज खेलने से आपकी रीडिंग स्किल इंप्रूव होगी, लर्निंग स्किल बढ़ेगी और आप अपनी तैयारी का स्वमूल्यांकन कर सकेंगे मतलब आप अपना याद किया हुआ चेक कर सकेंगे कि आपके द्वारा पढ़ा हुआ आपको कितना याद है?क्विज खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी तैयारी को एक दिशा दे पाएंगे।
A1.
इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर: कौशल विकास का नया अध्याय
India
Skills Accelerator: A New Chapter in Skill Development
हाल ही में, भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के साथ मिलकर एक नई पहल की शुरुआत की है, जिसका नाम है 'इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर (ISA)'।
यह पहल भारत के युवाओं के कौशल को निखारने और उन्हें वैश्विक रोज़गार बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाने का एक अनूठा प्रयास है। आइए, इस महत्त्वपूर्ण पहल के बारे में कुछ मुख्य बिंदुओं को जानें:
क्या है इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर (ISA)?
• यह एक राष्ट्रीय स्तर का सार्वजनिक-निजी सहयोग मंच है।
• इसका मुख्य उद्देश्य भारत के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र की चुनौतियों का समाधान करना है।
• यह नवाचार, ज्ञान साझा करने और नीतियों में सुधार के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा।
क्यों है यह पहल महत्त्वपूर्ण?
• यह पहल विश्व आर्थिक मंच की 'भविष्य की नौकरियों की 2025 रिपोर्ट' से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। इसका मतलब है कि यह भविष्य में आने वाली नौकरियों और उनके लिए आवश्यक कौशल पर ध्यान केंद्रित करेगी, ताकि हमारे युवा समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।
नेतृत्व और संरचना
यह मंच सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के नेतृत्व में काम करेगा।
इसके दो निजी सह-अध्यक्ष होंगे:
शोभना कामिनेनी, अपोलो हेल्थ कंपनी की कार्यकारी अध्यक्ष
संजीव बजाज, बजाज फिनसर्व के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक।
(कृपया ध्यान दें: मूल पाठ में संजीव बजाज के नाम से पहले गलत नंबरिंग थी, जिसे यहाँ ठीक कर दिया गया है।)
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के बारे में कुछ रोचक तथ्य:
यह एक गैर-लाभकारी (non-profit) अंतर्राष्ट्रीय संगठन है।
इसकी स्थापना वर्ष 1971 में हुई थी, तब इसे 'यूरोपीय प्रबंधन मंच' के नाम से जाना जाता था।
इसका मुख्यालय कोलोन, स्विट्जरलैंड में नहीं, बल्कि जिनेवा, स्विट्जरलैंड के पास कोलोन (Cologny) नामक स्थान पर है। मूल पाठ में "जिनेवा, स्विट्जरलैंड" लिखा गया है, जो है, लेकिन अधिक सटीक जानकारी के लिए "कोलोन" का भी उल्लेख किया जा सकता है।
यह हर साल स्विट्जरलैंड के दावोस में अपनी वार्षिक बैठक आयोजित करता है, जहाँ दुनिया भर के नेता महत्त्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
A2.
भारत की क्वांटम क्रांति: सुरक्षा और कंप्यूटिंग में नई ऊँचाई
India's
Quantum Leap: New Heights in Security and Computing
हाल ही में, दो भारतीय स्टार्टअप्स ने 'राष्ट्रीय क्वांटम मिशन' के तहत दो शानदार उत्पाद पेश किए हैं, जो भविष्य की तकनीक में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं।आइए, इन महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में कुछ मुख्य बिंदुओं को जानें:
Q-Shield: क्वांटम सुरक्षा का अभेद्य कवच
QNu लैब्स नामक एक स्टार्टअप ने दुनिया का पहला और सबसे अनोखा क्वांटम-आधारित प्लेटफ़ॉर्म 'Q-Shield' लॉन्च किया है।
इसका उद्देश्य क्या है? यह प्लेटफ़ॉर्म उद्यमों को उनके महत्त्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढाँचे को क्वांटम हमलों से सुरक्षित रखने में मदद करता है।
यह कैसे काम करता है? 'Q-Shield' क्वांटम कुंजी वितरण (Quantum Key Distribution -
QKD) और क्वांटम हार्डवेयर सुरक्षा मॉड्यूल (QHSM) जैसी पेटेंटेड तकनीकों का उपयोग करता है।
सेवाएँ: यह प्लेटफ़ॉर्म क्रिप्टोग्राफी प्रबंधन को आसान बनाता है और क्लाउड, ऑन-प्रिमाइसेस या हाइब्रिड जैसे किसी भी वातावरण में काम कर सकता है। इसमें सुरक्षित सहयोग के लिए QVerse और सुरक्षित फ़ाइल भंडारण के लिए QSFS जैसी कई सेवाएँ शामिल हैं।
QPI AI-Indus: भारत का शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर
QPI AI नामक एक अन्य स्टार्टअप ने 'विश्व क्वांटम दिवस' के अवसर पर भारत के सबसे शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों में से एक, 'QPI AI-Indus' का अनावरण किया है।
इसकी खासियत क्या है? यह भारत का पहला पूर्ण-स्टैक क्वांटम कंप्यूटिंग सिस्टम है, जिसमें 25 सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स की क्षमता है। इसमें उन्नत हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का संयोजन है, जो इसे हाइब्रिड कंप्यूटिंग के लिए आदर्श बनाता है।
यह लॉन्च कब हुआ? 14 अप्रैल को 'विश्व क्वांटम दिवस' के अवसर पर इसका अनावरण किया गया।
विश्व क्वांटम दिवस (World Quantum Day) क्यों है खास?
यह दिन हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है।
यह तिथि प्लैंक स्थिरांक (Planck's constant) के शुरुआती अंकों को दर्शाती है, जिसका मान लगभग 4.14 × 10 –15
eVs होता है। यह क्वांटम यांत्रिकी में एक महत्वपूर्ण मान है। यह दिन क्वांटम अवधारणाओं के बारे में आम जनता को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।
A3.
जापान का कमाल: दुनिया का पहला
3D-प्रिंटेड रेलवे स्टेशन
Japan's
Marvel: The World's First 3D-Printed Train Station
हाल ही में, वेस्ट जापान रेलवे कंपनी (JR वेस्ट) ने दुनिया का पहला 3D-प्रिंटेड रेलवे स्टेशन बनाया है, जो भविष्य की निर्माण तकनीक की एक झलक पेश करता है।
आइए, इस अद्भुत परियोजना के बारे में कुछ मुख्य बिंदुओं को जानें:
स्टेशन का नाम और स्थान:
इस नए स्टेशन का नाम हात्सुशिमा स्टेशन है।
यह जापान के वाकायामा प्रीफेक्चर के अरिदा शहर में स्थित है।
कैसे बना यह स्टेशन?
इस स्टेशन का निर्माण पारंपरिक तरीकों से नहीं, बल्कि 3D प्रिंटिंग तकनीक से किया गया है।
इसका निर्माण जापान की निर्माण प्रौद्योगिकी कंपनी Serendix ने किया है, जिसने पहले से तैयार (prefabricated) घटकों को प्रिंट किया था।
इन पूर्वनिर्मित घटकों को साइट पर असेंबल करके, स्टेशन को मात्र छह घंटे से भी कम समय में स्थापित कर दिया गया।
(यहाँ दी गई जानकारी में 'नपा स्टेशन' शब्द का उपयोग किया गया है, जो संभवतः 'हात्सुशिमा स्टेशन' का गलत संदर्भ है। लेख में इसे किया गया है।)
इस परियोजना के क्या लाभ हैं?
समय की बचत: जहाँ पारंपरिक निर्माण में महीनों लग सकते हैं, वहीं इस तकनीक से काम कुछ ही घंटों में पूरा हो गया।
लागत में कमी: 3D प्रिंटिंग से निर्माण की लागत में काफी कमी आती है।
श्रम की बचत: इसमें कम मानव श्रम की आवश्यकता होती है।
सेवाओं में न्यूनतम व्यवधान: चूँकि निर्माण बहुत कम समय में हुआ, इसलिए यात्रियों और ट्रेनों की सेवाओं में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आया।
किसकी जगह बना है यह स्टेशन?
यह नया 3D-प्रिंटेड स्टेशन एक पुराने लकड़ी के स्टेशन की जगह बनाया गया है, जो वर्ष 1948 से सेवा दे रहा था। यह आधुनिक तकनीक द्वारा पुरानी अवसंरचना को बदलने का एक बेहतरीन उदाहरण है।
A4.
समुद्री दुनिया में एक नया अध्याय: वैश्विक कार्बन टैक्स
A
New Chapter in the Maritime World: The Global Carbon Tax
क्या आप जानते हैं कि जहाजों से होने वाला प्रदूषण दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती है? अब इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत समेत 63 देशों ने एक ऐतिहासिक निर्णय में दुनिया के पहले वैश्विक कार्बन टैक्स का समर्थन किया है, जो सीधे शिपिंग उद्योग पर लगेगा। आइए, इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में विस्तार से जानें:
ऐतिहासिक फैसला: 11 अप्रैल
2025 को लंदन में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime
Organization - IMO) के मुख्यालय में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह पहली बार है जब किसी पूरे उद्योग पर वैश्विक स्तर पर कार्बन टैक्स लगाया गया है।
भारत की भूमिका: इस महत्वपूर्ण निर्णय में भारत ने 62 अन्य देशों के साथ मिलकर इसके पक्ष में मतदान किया। यह दिखाता है कि भारत भी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
उद्देश्य और क्रियान्वयन: इस कर का मुख्य उद्देश्य जहाजों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और स्वच्छ, कम कार्बन वाली प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना है।
यह कर वर्ष 2028 से लागू होगा, जिसके तहत जहाजों को या तो कम उत्सर्जन वाले ईंधन का उपयोग करना होगा या उनके प्रदूषण के लिए शुल्क का भुगतान करना होगा।
यह एक दो-तरफा दृष्टिकोण है: एक 'कमान और नियंत्रण' (command-and-control) नियामक ढाँचा जिसमें जहाजों को ईंधन के उपयोग के लिए मानकों का पालन करना होगा, और एक आर्थिक उपाय जिसमें वे अपने उत्सर्जन पर कर का भुगतान करेंगे।
राजस्व का उपयोग: इस कर से उत्पन्न होने वाला अनुमानित राजस्व वर्ष 2030 तक $40 बिलियन तक पहुँच सकता है। इस राजस्व का उपयोग विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने, यानी कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए किया जाएगा। यह एक "रिंग-फेंसड" (ring-fenced) फंड होगा, जिसका अर्थ है कि इसे केवल इसी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे अन्य जलवायु वित्त परियोजनाओं के लिए आवंटित नहीं किया जाएगा।
क्यों है यह महत्वपूर्ण? शिपिंग उद्योग वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का लगभग 3% हिस्सा है। इस टैक्स के लगने से इस क्षेत्र में बड़े बदलाव आएंगे और यह भविष्य में अन्य उद्योगों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि नए और टिकाऊ ईंधन स्रोतों जैसे कि अमोनिया और हाइड्रोजन के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
A5.
सौर शक्ति का नया साथी: मॉरीशस और ISA
Mauritius and ISA: A New Dawn for Solar Power
हाल ही में मॉरीशस ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के साथ एक ऐतिहासिक कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (CPF) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम मॉरीशस को CPF पर हस्ताक्षर करने वाला पहला अफ्रीकी देश बनाता है, जो सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्य बातें
चौथा देश: मॉरीशस वैश्विक स्तर पर चौथा देश है जिसने इस साझेदारी पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे पहले बांग्लादेश, भूटान और क्यूबा यह कदम उठा चुके हैं।
उद्देश्य: इस समझौते का मुख्य लक्ष्य ISA और मॉरीशस के बीच सौर ऊर्जा से जुड़ी पहलों पर सहयोग करना है। इसका उद्देश्य मॉरीशस की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ सौर ऊर्जा परियोजनाओं को जोड़ना है।
CPF क्या है?: CPF ISA द्वारा अपने सदस्य देशों के साथ दीर्घकालिक और मध्यम अवधि के सहयोग को आसान बनाने के लिए एक रणनीतिक पहल है। यह सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान करता है।
यह समझौता मॉरीशस के लिए सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यह दिखाता है कि कैसे छोटे द्वीप राष्ट्र भी स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुछ और जानकारी:
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): यह 121 से अधिक देशों का एक गठबंधन है, जिसकी शुरुआत भारत और फ्रांस ने 2015 में की थी। इसका मुख्य लक्ष्य सौर ऊर्जा के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है।
मुख्यालय:
ISA का मुख्यालय भारत के गुरुग्राम में स्थित है, जो इसे भारत में स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन बनाता है।
A6.
ओटावा कन्वेंशन: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा की नई चुनौतियाँ
Ottawa
Convention: From a Global Treaty to a Security Concern
हाल ही में, फ़िनलैंड और तीन बाल्टिक राज्य (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) ओटावा कन्वेंशन से पीछे हटने की योजना बना रहे हैं। ये सभी नाटो के सदस्य हैं और इनकी सीमाएँ रूस से लगती हैं।
मुख्य कारण:
रूस-यूक्रेन युद्ध: इन देशों को डर है कि रूस इस युद्ध के बाद और भी ज़्यादा आक्रामक हो सकता है। उन्हें लगता है कि युद्धविराम होने पर रूस फिर से अपनी सैन्य ताकत बढ़ा सकता है और उनकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
सुरक्षा का खतरा: ओटावा कन्वेंशन के तहत लैंडमाइन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। इन देशों को लगता है कि लैंडमाइन का इस्तेमाल न कर पाना उनकी रक्षा प्रणाली को कमजोर करता है, खासकर रूस जैसे बड़े पड़ोसी के खिलाफ।
ओटावा कन्वेंशन क्या है?
ओटावा कन्वेंशन एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसका मुख्य उद्देश्य दुनिया को एंटी-पर्सनल लैंडमाइन से मुक्त करना है।
उद्देश्य: यह संधि विशेष रूप से व्यक्तियों (सैनिकों सहित) को नुकसान पहुँचाने या घायल करने के लिए बनाई गई एंटी-पर्सनल लैंडमाइन के उपयोग, उत्पादन, भंडारण और हस्तांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है।
स्थापना: इसे 18 सितंबर, 1997 को ओस्लो, नॉर्वे में एक राजनयिक सम्मेलन में अंतिम रूप दिया गया था।
लागू होना: यह संधि 1 मार्च, 1999 को प्रभावी हुई।
सदस्य: वर्तमान में, इस संधि में 164 राज्य पक्ष हैं, जो इसके नियमों का पालन करते हैं। हालांकि, भारत, चीन, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे कई बड़े और महत्वपूर्ण सैन्य शक्ति वाले देश इस संधि का हिस्सा नहीं हैं।
महत्व: यह संधि इसलिए भी खास है क्योंकि इसने युद्ध में आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया। लैंडमाइन अक्सर युद्ध के बाद भी कई सालों तक ज़मीन में दबी रहती हैं, जिससे बच्चों, किसानों और राहगीरों की जान जाती है या वे अपंग हो जाते हैं।
भारत और ओटावा कन्वेंशन
भारत इस कन्वेंशन का हिस्सा नहीं है। भारत का मानना है कि अपनी रक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए उसे कुछ प्रकार की लैंडमाइन की ज़रूरत है। हालांकि, भारत ने मानवीय आधार पर एंटी-पर्सनल लैंडमाइन के निर्यात पर रोक लगा रखी है और वह स्थायी रूप से निषिद्ध लैंडमाइन (Non-Permanent
Anti-Personnel Mines) का उपयोग करता है, जिन्हें युद्ध के बाद हटाया जा सकता है।
उपरोक्त घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न के लिए यहां क्लिक करें ।
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