1 August 2025 Current Affairs Questions
हैलो दोस्तों !
आज हम current affairs के इन बिंदुओं पर गहराई से विचार करेंगे और उम्मीद करेंगे कि आप इन बिंदुओं को लंबे समय तक याद रखने के लिए हमारे साथ 30 से अधिक प्रश्नों की क्विज जरूर खेलेंगे. दी गई घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न नीचे दिए गए हैं।
- A1. राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति का निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला
- A2. राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025: सशक्तिकरण, नवाचार और स्थिरता की कहानी
- A3. भारतीय रेलवे की हरित क्रांति: सौर ऊर्जा का बढ़ता कदम
- A4. अमरावती: हरित भविष्य की ओर पहला कदम
- A5. 110 साल पुराना पुल, नई पहचान: न्यू पंबन ब्रिज की कहानी
- A6. ओडिशा की संस्कृति का गौरव: यूनेस्को की ओर पहला कदम
आप प्रतिदिन हमारी वेबसाइट SelfStudy Meter पर 30 करंट अफेयर प्रश्नों को पढ़ सकते हैं और अगले दिन सुबह 7:00 बजे इन पढ़े हुए प्रश्नों की क्विज खेल सकते हैं हमारे YouTube channel - Mission: CAGS पर, जबकि प्रतिदिन 45 से अधिक करंट अफेयर प्रश्नों की क्विज खेलने के लिए व pdf डाउनलोड करने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो कर सकते हैं ।
Our Telegram channel - Mission: CAGS
Quiz time on Telegram is 7:30 p.m
क्विज खेलने के फायदे:
क्विज खेलने से आपकी रीडिंग स्किल इंप्रूव होगी, लर्निंग स्किल बढ़ेगी और आप अपनी तैयारी का स्वमूल्यांकन कर सकेंगे मतलब आप अपना याद किया हुआ चेक कर सकेंगे कि आपके द्वारा पढ़ा हुआ आपको कितना याद है?क्विज खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी तैयारी को एक दिशा दे पाएंगे।
A1.
राज्य विधेयकों पर राष्ट्रपति का निर्णय: सर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला
President's
Decision on State Bills: A Landmark Supreme Court Ruling
क्या आप जानते हैं कि राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति को कितने समय में निर्णय लेना होता है? हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो केंद्र-राज्य संबंधों को नया आयाम देगा।
मुख्य बिंदु:
ऐतिहासिक समय-सीमा: सर्वोच्च न्यायालय ने पहली बार यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति को राज्यपाल द्वारा विचार के लिए आरक्षित (सुरक्षित) किए गए राज्य विधेयकों पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। यह समय-सीमा उस तारीख से शुरू होगी जब राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक प्राप्त होता है।
अनुच्छेद 201 की व्याख्या: यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 201 की विस्तृत व्याख्या करता है। यह अनुच्छेद राज्यपाल को कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की शक्ति देता है।
तमिलनाडु का मामला: यह महत्वपूर्ण निर्णय 8 अप्रैल, 2025 के एक फैसले से आया है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि द्वारा नवंबर 2023 में 10 विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की कार्रवाई को अवैध और गलत घोषित किया था। राज्यपाल ने इन विधेयकों को तब आरक्षित किया था जब राज्य विधानसभा उन पर पुनर्विचार कर चुकी थी। यह दर्शाता है कि राज्यपाल को अपने संवैधानिक दायरे में ही कार्य करना होगा।
राज्यपाल के पद का संतुलन: न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के कार्यों के लिए समय-सीमा निर्धारित करके वे राज्यपाल के पद को कमजोर नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें संसदीय लोकतंत्र की स्थापित परंपराओं के प्रति उचित सम्मान के साथ कार्य करना चाहिए।
राष्ट्रपति के विकल्प: अनुच्छेद 201
के तहत, राज्यपाल द्वारा विधेयक को आरक्षित करने के बाद राष्ट्रपति के पास दो मुख्य विकल्प होते हैं:
विधेयक को स्वीकृति प्रदान करना (सहमति देना)।
विधेयक पर अपनी सहमति रोकना (वीटो करना)।
पूर्व की सिफारिशें: यह ध्यान देने योग्य है कि सरकारिया आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007) जैसे महत्वपूर्ण आयोगों ने भी अनुच्छेद 201 के तहत संदर्भित विधेयकों के कुशल निपटान के लिए एक निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने का सुझाव दिया था। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला इन सिफारिशों को अब कानूनी रूप दे रहा है।
केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभाव: यह फैसला केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों में स्पष्टता लाएगा और राज्यपालों द्वारा विधेयकों को अनिश्चित काल तक लंबित रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगाएगा, जिससे राज्यों में विधायी प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सकेगी। यह संघवाद की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
A2.
राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025: सशक्तिकरण, नवाचार और स्थिरता की कहानी
Panchayati
Raj Day 2025: Celebrating 32 Years of Grassroots Democracy
24 अप्रैल,
2025 को भारत ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (एनपीआरडी) मनाया, जो 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के बत्तीस वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। इस अधिनियम ने पंचायतों को ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के रूप में संवैधानिक दर्जा दिया। यह दिन भारत की लोकतांत्रिक जड़ों को मज़बूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति देने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।
इस वर्ष का मुख्य समारोह बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर ब्लॉक के लौहना उत्तर ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश भर के पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) और ग्राम सभाओं को संबोधित किया, और राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 के तहत विशेष श्रेणी के पुरस्कार भी प्रदान किए।
राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 की मुख्य बातें:
यह पहली बार है कि पंचायती राज मंत्रालय ने जलवायु कार्रवाई और आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में ग्राम पंचायतों के अनुकरणीय प्रयासों को प्रोत्साहित करने और मान्यता देने के लिए समर्पित विशेष श्रेणी पुरस्कारों को संस्थागत रूप दिया है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य पंचायतों को इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और अधिक योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।
पुरस्कार राशि:
रैंक 1: ₹1 करोड़
रैंक 2: ₹75 लाख
रैंक 3: ₹50 लाख
पुरस्कार विजेताओं को विशेष रूप से डिज़ाइन की गई ट्रॉफी और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
महिला सशक्तिकरण:
कुल 6 पुरस्कार विजेता ग्राम पंचायतों में से 3 पंचायतों की मुखिया महिला सरपंच हैं। यह ग्रामीण भारत में महिला नेतृत्व और सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण है। इनमें बिहार की मोतीपुर ग्राम पंचायत, महाराष्ट्र की दव्वा एस ग्राम पंचायत, और ओडिशा की हटबदरा ग्राम पंचायत शामिल हैं।
विशेष पुरस्कार विजेता ग्राम पंचायतें:
यहाँ राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 के तहत विभिन्न श्रेणियों में विजेता पंचायतों का विवरण दिया गया है:
जलवायु कार्रवाई विशेष पंचायत पुरस्कार (CASPA) - (Climate
Action Special Panchayat Award):
रैंक 1: दव्वा एस ग्राम पंचायत, गोंदिया जिला, महाराष्ट्र
रैंक 2: बिस्दाहल्ली ग्राम पंचायत, हसन जिला, कर्नाटक (आपके दिए गए टेक्स्ट में "बिस्दाहल्ली याम पंचायत" की जगह "बिस्दाहल्ली ग्राम पंचायत" होगा)
रैंक 3: मोतीपुर ग्राम पंचायत, समस्तीपुर जिला, बिहार
आत्म निर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार (ANPSA) - (Atma
Nirbhar Panchayat Special Award):
रैंक 1: मॉल ग्राम पंचायत, रंगारेड्डी जिला, तेलंगाना (आपके दिए गए टेक्स्ट में "मॉल याम पंचायत" की जगह "मॉल ग्राम पंचायत" होगा)
रैंक 2: हटबदरा ग्राम पंचायत, मयूरभंज जिला, ओडिशा
रैंक 3: गौलापुडी ग्राम पंचायत, कृष्णा जिला, आंध्र प्रदेश
पंचायत क्षमता निर्माण सर्वोत्तम संस्थान पुरस्कार (PKNSSP):
पंचायतों की क्षमता निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले संस्थानों को भी सम्मानित किया गया:
रैंक 1: केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन (KILA), केरल
रैंक 2: राज्य ग्रामीण विकास संस्थान और पंचायती राज, ओडिशा
रैंक 3: राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, असम
A3.
भारतीय रेलवे की हरित क्रांति: सौर ऊर्जा का बढ़ता कदम
Indian
Railways' Green Revolution: The Growing Step of Solar Energy
भारतीय रेलवे पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ परिवहन के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा का उपयोग एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
देश का अग्रणी राज्य: राजस्थान
2 अप्रैल, 2025 को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि राजस्थान 275 रेलवे स्टेशनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने वाला देश का शीर्ष राज्य बन गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि राजस्थान हरित ऊर्जा को अपनाने में सबसे आगे है।
सौर ऊर्जा का बढ़ता ग्राफ (राष्ट्रीय परिदृश्य):
भारत सरकार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान देश में कुल 25 गीगावॉट (GW) अक्षय ऊर्जा जोड़ी गई।
इसमें से 6 गीगावॉट (GW) सौर ऊर्जा थी, जो सौर ऊर्जा के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।
31 मार्च, 2025 तक, देश में कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 81 गीगावॉट (GW) हो गई है। (यहां मूल पाठ में 21 GW की गलती को 81 GW में सुधारा गया है, जो नवीनतम उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिक सटीक है)।
भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी लक्ष्य:
100% विद्युतीकरण: भारतीय रेलवे ने वर्ष 2025-26 तक 100% विद्युतीकरण हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य परिचालन दक्षता बढ़ाने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण होगा।
शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जक: रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2030 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जक बनना है। यह एक बहुत ही महत्वाकांक्षी लक्ष्य है जो भारतीय रेलवे को वैश्विक स्तर पर अग्रणी हरित परिवहन प्रदाताओं में से एक बना देगा।
20 GW सौर ऊर्जा संयंत्र: वर्ष 2030 तक, भारतीय रेलवे ने अपनी खाली पड़ी जमीन का उपयोग करके 20 गीगावॉट (GW) क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। यह रेलवे की अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ राष्ट्रीय ग्रिड में योगदान करने की क्षमता को भी बढ़ाएगा।
सौर ऊर्जा से लैस रेलवे स्टेशन:
फरवरी, 2025 तक, रेल मंत्रालय के अनुसार, देश के कुल 2249 रेलवे स्टेशनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि सौर ऊर्जा का उपयोग दूरदराज के और छोटे स्टेशनों तक भी फैल रहा है।
शीर्ष 5 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (सौर ऊर्जा संयंत्रों वाले स्टेशनों की संख्या के आधार पर):
1. राजस्थान:
275 स्टेशन
2. महाराष्ट्र:
270 स्टेशन
3. पश्चिम बंगाल: 237 स्टेशन
4. उत्तर प्रदेश: 204 स्टेशन
5. आंध्र प्रदेश: 198 स्टेशन
A4.
अमरावती: हरित भविष्य की ओर पहला कदम
Amaravati:
A Leap Towards a Green Future
आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती, एक ऐसा शहर बनने की ओर अग्रसर है जो पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा पर चलेगा, और यह वास्तव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी!
विश्व का पहला पूर्णतः नवीकरणीय ऊर्जा शहर? अमरावती का लक्ष्य पूरी तरह से अक्षय ऊर्जा पर चलने वाला विश्व का पहला नियोजित शहर बनना है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो सतत शहरी विकास के लिए एक मिसाल कायम करेगा।
स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य: यह ग्रीनफ़ील्ड शहर सौर, पवन और जलविद्युत स्रोतों से कुल 2,700 मेगावाट (MW) स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य रखता है। यह एक बड़ी क्षमता है जो शहर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
परियोजना की लागत और विस्तार: लगभग
65,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना कृष्णा नदी के किनारे लगभग 217 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित की जा रही है। यह एक विशाल निवेश है जो शहर के आधुनिक और टिकाऊ बुनियादी ढांचे को बनाने में लगेगा।
सामरिक स्थान: अमरावती, विजयवाड़ा और गुंटूर के बीच strategically स्थित है। यह आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र (APCRDA) का हिस्सा है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 8,352 वर्ग किलोमीटर है। यह स्थान इसे एक प्रमुख आर्थिक और प्रशासनिक केंद्र बनने में मदद करेगा।
जीवाश्म ईंधन से मुक्ति: 2,700 मेगावाट बिजली क्षमता का लक्ष्य शहर को जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से पूरी तरह से मुक्त कर देगा। यह वायु प्रदूषण को कम करने और कार्बन पदचिह्न को घटाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
2050
तक ऊर्जा आवश्यकता: अनुमान है कि वर्ष 2050 तक अमरावती को लगभग 2.7 गीगावाट (GW) बिजली की आवश्यकता होगी। 2.7 गीगावाट 2,700 मेगावाट के बराबर है, इसलिए वर्तमान लक्ष्य भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त लगता है, बशर्ते ऊर्जा दक्षता उपायों को भी लागू किया जाए।
हरित परिवहन: केवल इमारतों और उद्योगों तक ही सीमित नहीं, अमरावती की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली भी अक्षय ऊर्जा पर चलेगी, जिसमें अमरावती मेट्रो और इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। यह एक समग्र दृष्टिकोण है जो शहर को हर पहलू से हरा-भरा बनाने पर केंद्रित है।
अतिरिक्त जानकारी:
स्मार्ट सिटी अवधारणा: अमरावती को केवल एक हरित शहर नहीं, बल्कि एक 'स्मार्ट सिटी' के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक तकनीक और डेटा-संचालित समाधानों का उपयोग शहरी जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
पर्यावरणीय प्रभाव: इस तरह की परियोजनाएं वैश्विक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अमरावती अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है कि कैसे बड़े पैमाने पर शहरी विकास को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ जोड़ा जा सकता है।
चुनौतियाँ और अवसर: इतनी बड़ी परियोजना में चुनौतियाँ भी होंगी, जैसे भूमि अधिग्रहण, फंडिंग, और तकनीकी कार्यान्वयन। हालांकि, यह भारत के लिए अक्षय ऊर्जा और सतत शहरी विकास के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का एक बड़ा अवसर भी है।
A5.
110
साल पुराना पुल, नई पहचान: न्यू पंबन ब्रिज की कहानी
110-Year-Old
Bridge, New Identity: The Story of the New Pamban Bridge
क्या आप जानते हैं कि भारत ने हाल ही में एक ऐसा अद्भुत समुद्री पुल बनाया है जो जहाजों को नीचे से सुरक्षित रूप से गुजरने देने के लिए 'ऊपर उठ' सकता है? जी हाँ, यह है तमिलनाडु में स्थित न्यू पंबन ब्रिज, जो भारत के इंजीनियरिंग कौशल का एक शानदार उदाहरण है!
उद्घाटन की तिथि और स्थान:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अप्रैल, 2025 को इस पुल का उद्घाटन किया।
यह रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ता है।
महत्वपूर्ण सुधार: दी गई जानकारी में 2.08 किलोमीटर और 72.5 मीटर की लंबाई का विरोधाभास था। जानकारी यह है कि पूरे पुल की लंबाई लगभग 2.08 किलोमीटर (या 2,080 मीटर) है, जबकि इसका वर्टिकल लिफ्ट स्पैन (उठने वाला हिस्सा) 72.5 मीटर लंबा है।
अद्वितीय विशेषता - वर्टिकल लिफ्ट:
यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल है।
इसके 72.5 मीटर लंबे हिस्से को 17 मीटर तक लंबवत् रूप से ऊपर उठाया जा सकता है, जिससे बड़े जहाज आसानी से इसके नीचे से गुजर सकें। यह सुविधा समुद्री यातायात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना:
लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस पुल में बेहतर नेविगेशन और स्थायित्व के लिए उन्नत सामग्री और तकनीक का उपयोग किया गया है।
इसे रेल मंत्रालय के तहत एक नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम, रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) द्वारा बनाया गया है। यहाँ दी गई जानकारी में लागत को लेकर कुछ भ्रम था। परियोजना की कुल लागत 550 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि RVNL द्वारा "700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित" का उल्लेख है। आमतौर पर, ऐसी परियोजनाओं में कुल परियोजना लागत और निर्माण एजेंसी को भुगतान की गई लागत में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन 550 करोड़ रुपये की आंकड़ा व्यापक रूप से उद्धृत किया जाता है।
वैश्विक पहचान:
इसकी तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका के गोल्डन गेट ब्रिज, यूके के टावर ब्रिज और डेनमार्क तथा स्वीडन के बीच के ओरेसंड ब्रिज जैसे विश्व-प्रसिद्ध पुलों से की जा रही है, जो इसकी इंजीनियरिंग और महत्व को दर्शाता है।
पुराने पुल का उत्तराधिकारी:
यह नया पुल 110 साल पुराने पंबन ब्रिज का स्थान लेता है, जिसे वर्ष 2022 में उसकी उम्र और रखरखाव की चुनौतियों के कारण बंद कर दिया गया था।
पुराने पंबन ब्रिज का निर्माण वर्ष 1914 में ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा किया गया था। इसमें मैन्युअल रूप से संचालित शेरज़र स्पैन (एक प्रकार का रोलिंग लिफ्ट ब्रिज) का उपयोग किया गया था, जो अपने समय में एक इंजीनियरिंग उपलब्धि थी।
रणनीतिक महत्व:
रामनाथपुरम जिले में स्थित यह पुल रामेश्वरम द्वीप को मुख्य भूमि पर मंडपम से जोड़ता है, जो न केवल धार्मिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि सामरिक रूप से भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
A6.
ओडिशा की संस्कृति का गौरव:
यूनेस्को की ओर पहला कदम
A
Step Closer to UNESCO Recognition for Odisha's Iconic Festivals
भारत अपने समृद्ध त्योहारों और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है? इन्हीं में से दो प्रमुख त्योहार हैं ओडिशा की रथ यात्रा और बाली यात्रा। इन दोनों त्योहारों को केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत संगीत नाटक अकादमी की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural
Heritage) की राष्ट्रीय सूची में शामिल कर लिया गया है। यह यूनेस्को (UNESCO) से वैश्विक मान्यता प्राप्त करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है!
राष्ट्रीय पहचान: रथ यात्रा और बाली यात्रा को अब भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में आधिकारिक पहचान मिल गई है। संगीत नाटक अकादमी की वेबसाइट पर बाली यात्रा को 45वें और पुरी की रथ यात्रा को 54वें स्थान पर सूचीबद्ध किया गया है।
यूनेस्को की राह: यह सूचीकरण यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने की दिशा में पहला कदम है। एक बार यूनेस्को द्वारा मान्यता मिलने के बाद, इन त्योहारों को वैश्विक मंच पर और अधिक पहचान मिलेगी, जिससे उनके संरक्षण और प्रचार में मदद मिलेगी।
ओडिशा का गौरव: वर्तमान में, ओडिशा से यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में एकमात्र तत्व मयूरभंज का छऊ नृत्य है, जिसे वर्ष 2010 में सराइकेला और पुरुलिया के छऊ नृत्य की अन्य शैलियों के साथ शामिल किया गया था। रथ यात्रा और बाली यात्रा का राष्ट्रीय सूची में आना ओडिशा के लिए एक और गौरव का क्षण है।
### इन त्योहारों के बारे में कुछ और जानें:
रथ यात्रा: यह त्योहार ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। हर साल आयोजित होने वाली यह यात्रा लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। भक्त विशालकाय रथों को खींचते हुए गुंडिचा मंदिर तक ले जाते हैं, जो एक अनूठी और अद्भुत परंपरा है।
बाली यात्रा: यह त्योहार ओडिशा के कटक में मनाया जाता है। यह प्राचीन समुद्री व्यापार की याद दिलाता है जब ओडिशा (जो उस समय कलिंग के नाम से जाना जाता था) के नाविक बाली, सुमात्रा, जावा और बोर्नियो जैसे दूरदराज के देशों के साथ व्यापार करते थे। यह त्योहार महानदी नदी के तट पर एक बड़े मेले के रूप में आयोजित होता है।
उपरोक्त घटनाओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न के लिए यहां क्लिक करें ।
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