16 May 2025 Current Affairs Questions
हैलो दोस्तों !
आज हम current affairs के इन बिंदुओं पर गहराई से विचार करेंगे और उम्मीद करेंगे कि आप इन बिंदुओं को लंबे समय तक याद रखने के लिए हमारे साथ 30 से अधिक प्रश्नों की क्विज जरूर खेलेंगे
- A1. भारत का पहला सफेद बाघ प्रजनन केंद्र
- A2. लीथियम गठजोड़: भारत और अर्जेंटीना की नई राह
- A3. नवम परहेरा: श्रीलंका का रंगारंग उत्सव
- A4. भारत रंग महोत्सव 2025: विश्व रंगमंच का संगम
- A5. एक देश, एक कानून: समान नागरिक संहिता की ओर कदम
- A6. कृषि का भविष्य: एग्रीहब और एलएएएम
आप प्रतिदिन हमारी वेबसाइट SelfStudy Meter पर 30 करंट अफेयर प्रश्नों को पढ़ सकते हैं और अगले दिन सुबह 7:00 बजे इन पढ़े हुए प्रश्नों की क्विज खेल सकते हैं हमारे YouTube channel - Mission: CAGS पर, जबकि प्रतिदिन 45 से अधिक करंट अफेयर प्रश्नों की क्विज खेलने के लिए व pdf डाउनलोड करने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो कर सकते हैं ।Our Telegram channel - Mission: CAGS
Quiz time on Telegram is 7:30 p.m
क्विज खेलने के फायदे:
क्विज खेलने से आपकी रीडिंग स्किल इंप्रूव होगी, लर्निंग स्किल बढ़ेगी और आप अपनी तैयारी का स्वमूल्यांकन कर सकेंगे मतलब आप अपना याद किया हुआ चेक कर सकेंगे कि आपके द्वारा पढ़ा हुआ आपको कितना याद है?क्विज खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी तैयारी को एक दिशा दे पाएंगे।
A1.
अंतरिक्ष में गोफन: प्रक्षेपण का भविष्य?
Slingshot
to Space: The Future of Launch?
कैलिफ़ोर्निया की एक नई कंपनी, स्पिनलॉन्च, अंतरिक्ष में उपग्रहों को भेजने का एक क्रांतिकारी तरीका लेकर आई है।
उन्होंने एक विशाल यांत्रिक गुलेल (catapult) बनाया है। यह एक बहुत बड़ी घूमने वाली भुजा का उपयोग करता है।
यह भुजा उपग्रहों को अविश्वसनीय रूप से तेज गति से, यानी हाइपरसोनिक गति से अंतरिक्ष में फेंकती है।
अतिरिक्त जानकारी: हाइपरसोनिक गति ध्वनि की गति से पाँच गुना या उससे अधिक होती है।
यह पूरी तरह से बिजली से चलने वाली तकनीक है।
स्पिनलॉन्च का दावा है कि यह विधि रॉकेट से उपग्रह लॉन्च करने की तुलना में लागत को बहुत कम कर सकती है।
इसके अतिरिक्त, यह पर्यावरण के लिए भी अधिक अनुकूल हो सकती है क्योंकि इसमें पारंपरिक रॉकेट ईंधन का उपयोग नहीं होता है, जिससे प्रदूषण कम होगा।
इस तकनीक के कारण, अंतरिक्ष तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान और सस्ता हो जाएगा, जिससे कई नई कंपनियां और देश अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे।
स्पिनलॉन्च को नासा (NASA), एयरबस (Airbus), और अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) जैसी बड़ी संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है।
कंपनी की योजना है कि वे 2026 तक इस नई विधि से उपग्रहों को कक्षा में प्रक्षेपित करना शुरू कर देंगे।
यह अंतरिक्ष उड़ान के भविष्य को और अधिक टिकाऊ (sustainable) बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अतिरिक्त जानकारी: स्पिनलॉन्च का यह सिस्टम पृथ्वी की सतह पर ही काम करता है और इसमें एक वैक्यूम चैंबर होता है जिसके अंदर भुजा घूमती है। यह वायु प्रतिरोध को कम करता है और उच्च गति प्राप्त करने में मदद करता है। प्रक्षेपित किए जाने वाले उपग्रह विशेष रूप से इस उच्च-जी बल का सामना करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न:
1. स्पिनलॉन्च कहाँ स्थित एक स्टार्टअप है?
a. न्यूयॉर्क
b. टेक्सास
c. कैलिफ़ोर्निया
d. फ्लोरिडा
2. स्पिनलॉन्च उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने के लिए किस तकनीक का उपयोग करता है?
a. पारंपरिक रॉकेट
b. आयन थ्रस्टर
c. विशाल यांत्रिक गुलेल
d. सौर पाल
3. हाइपरसोनिक गति ध्वनि की गति से कितनी तेज होती है?
a. दो गुना
b. तीन गुना
c. पांच गुना या उससे अधिक
d. दस गुना
4. स्पिनलॉन्च किस वर्ष तक उपग्रहों को कक्षा में प्रक्षेपित करना शुरू करने की योजना बना रहा है?
a. 2024
b. 2025
c. 2026
d. 2027
5. स्पिनलॉन्च की प्रक्षेपण विधि का मुख्य संभावित लाभ क्या है?
a. अधिक पेलोड क्षमता
b. तेज प्रक्षेपण समय
c. लॉन्च की कम लागत और कम पर्यावरणीय प्रभाव
d. अधिक सटीक कक्षा निर्धारण
A2.
बांझपन का नया समाधान: इन-विट्रो गैमेटोजेनेसिस
A
New Solution for Infertility: In-Vitro Gametogenesis
वैज्ञानिकों ने एक अभूतपूर्व तकनीक विकसित की है जिसे इन-विट्रो गैमेटोजेनेसिस (IVG) कहा जाता है। यह तकनीक प्रयोगशाला में स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके कृत्रिम रूप से अंडे और शुक्राणु बनाने की क्षमता रखती है।
कैसे काम करता है? IVG में त्वचा, बाल या रक्त जैसे स्रोतों से प्लूरिपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ (Pluripotent Stem Cells) एकत्र की जाती हैं। इन स्टेम कोशिकाओं में शरीर की किसी भी कोशिका प्रकार में विकसित होने की क्षमता होती है। प्रयोगशाला में, इन स्टेम कोशिकाओं को विशेष परिस्थितियों में अंडे (ओवा) या शुक्राणु कोशिकाओं (स्पर्मेटोज़ोआ) में विकसित किया जाता है।
प्रयोगशाला में विकसित इन अंडों और शुक्राणुओं को पारंपरिक इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया के माध्यम से निषेचित किया जा सकता है। निषेचित भ्रूण को फिर गर्भधारण के लिए एक सरोगेट माता के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
सफलता की कहानियाँ: जापान के वैज्ञानिकों ने IVG तकनीक का उपयोग करके चूहों में सफलतापूर्वक प्रजनन कराया है। इससे मानवों में भी इस तकनीक के सफल होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं को अगले तीन वर्षों के भीतर मानव परीक्षण शुरू होने की संभावना है।
आईवीएफ से बेहतर? IVG में पारंपरिक आईवीएफ की तुलना में कई संभावित लाभ हैं:
·
बांझपन से जूझ रही महिलाओं के लिए यह एक नया विकल्प प्रदान कर सकता है, खासकर उन मामलों में जहां अंडे का उत्पादन सीमित या अनुपस्थित है।
·
समान-लिंग वाले जोड़े जैविक रूप से अपने बच्चे पैदा करने में सक्षम हो सकते हैं, क्योंकि दोनों भागीदारों की स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके अंडे या शुक्राणु बनाए जा सकते हैं।
·
वृद्ध महिलाएं, जिनकी प्रजनन क्षमता प्राकृतिक रूप से कम हो जाती है, वे भी इस तकनीक से गर्भधारण कर सकती हैं, संभावित रूप से दाता अंडे या शुक्राणु की आवश्यकता को समाप्त कर सकती हैं।
·
IVG भविष्य में उन व्यक्तियों के लिए प्रजनन का विकल्प खोल सकता है जिन्होंने कैंसर के उपचार जैसे चिकित्सा हस्तक्षेपों के कारण अपनी प्रजनन क्षमता खो दी है।
चुनौतियाँ और भविष्य: हालांकि IVG अत्यधिक आशाजनक है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियाँ हैं जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मानवों में इस तकनीक की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक शोध और नैदानिक परीक्षण आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त, इस तकनीक के नैतिक और सामाजिक निहितार्थों पर भी विचार करना महत्वपूर्ण होगा।
बहुविकल्पीय प्रश्न:
6. इन-विट्रो गैमेटोजेनेसिस (IVG) में किस प्रकार की कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है?
a. सामान्य रक्त कोशिकाएँ
b. परिपक्व अंडाणु कोशिकाएँ
c. प्लूरिपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ
d. परिपक्व शुक्राणु कोशिकाएँ
Answer and Explanation
7. जापान के वैज्ञानिकों ने किस जीव पर सफलतापूर्वक इन-विट्रो गैमेटोजेनेसिस का प्रयोग किया?
a. मनुष्य
b. बंदर
c. चूहे
d. खरगोश
8. ब्रिटेन के शोधकर्ताओं को कितने वर्षों के भीतर मनुष्यों पर इन-विट्रो गैमेटोजेनेसिस का परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है?
a. एक वर्ष
b. दो वर्ष
c. तीन वर्ष
d. पाँच वर्ष
9. इन-विट्रो गैमेटोजेनेसिस का निम्नलिखित में से कौन सा संभावित लाभ इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) से बेहतर हो सकता है?
a. भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित करने की क्षमता
b. प्रयोगशाला में निषेचन की प्रक्रिया
c. समान-लिंग वाले जोड़ों के लिए जैविक रूप से बच्चे पैदा करने की संभावना
d. गर्भावस्था प्राप्त करने की सफलता दर
10. इन-विट्रो गैमेटोजेनेसिस के विकास से भविष्य में किन व्यक्तियों को लाभ हो सकता है?
a. केवल बांझपन से जूझ रही महिलाएं
b. केवल वृद्ध महिलाएं
c. केवल समान-लिंग वाले जोड़े
d. बांझपन से जूझ रहे व्यक्ति, समान-लिंग वाले जोड़े और कैंसर के उपचार के कारण प्रजनन क्षमता खो चुके व्यक्ति
A3.
आकाशगंगा का सबसे बड़ा ब्लैक होल: गैया BH3
Galaxy's Largest Black
Hole: Gaia BH3
खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा में अब तक के सबसे विशाल तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की खोज की है, जिसका नाम गैया BH3
रखा गया है। यह ब्लैक होल एक्विला तारामंडल (Aquila constellation) में स्थित है।
इस महत्वपूर्ण खोज के मुख्य बिंदु:
खोजकर्ता: यह ब्लैक होल यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency -
ESA) के गैया टेलीस्कोप (Gaia telescope) का उपयोग करके खोजा गया है।
तीसरा ब्लैक होल: गैया टेलीस्कोप द्वारा खोजा गया यह तीसरा ब्लैक होल है। इससे पहले, गैया BH1
को वर्ष 2022 में और गैया BH2
को वर्ष 2023 में खोजा गया था।
गैया मिशन: गैया टेलीस्कोप वर्ष 2013 से हमारी आकाशगंगा में अरबों तारों की गति पर लगातार नज़र रख रहा है। इसी डेटा के विश्लेषण से यह महत्वपूर्ण खोज संभव हो पाई है।
विशाल द्रव्यमान: गैया BH3 का द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान से लगभग 33 गुना अधिक है। यह इसे हमारी आकाशगंगा में ज्ञात सबसे विशाल तारकीय द्रव्यमान वाला ब्लैक होल बनाता है।
तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल: इस प्रकार के ब्लैक होल तब बनते हैं जब सूर्य से लगभग 5 से 10 गुना या उससे भी अधिक द्रव्यमान वाले विशाल तारे अपने जीवन के अंत में ढह जाते हैं। गुरुत्वाकर्षण के कारण उनका सारा द्रव्यमान एक छोटे से क्षेत्र में सिमट जाता है, जिससे ब्लैक होल का निर्माण होता है।
अतिरिक्त जानकारी:
गैया BH3
एक निष्क्रिय ब्लैक होल है, जिसका अर्थ है कि यह वर्तमान में बड़ी मात्रा में पदार्थ को निगल नहीं रहा है और इसलिए यह एक्स-रे जैसे उच्च-ऊर्जा विकिरण उत्सर्जित नहीं कर रहा है। इसकी उपस्थिति का पता इसके साथी तारे की गति पर इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के माध्यम से चला। गैया ने इस ब्लैक होल के चारों ओर परिक्रमा कर रहे एक तारे की अजीब गति को मापा, जिससे खगोलविदों को इसके विशाल द्रव्यमान का अनुमान लगाने में मदद मिली।
यह खोज तारकीय विकास और ब्लैक होल निर्माण की हमारी समझ को और गहरा करती है। इतने विशाल तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की खोज से पता चलता है कि विशाल तारे अपने जीवन के अंत में पहले सोचे गए तरीके से अधिक द्रव्यमान बरकरार रख सकते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न:
11. खगोलविदों ने आकाशगंगा में सबसे बड़े तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की खोज किस तारामंडल में की है?
a. सप्तर्षि
b. मृगशिरा
c. एक्विला
d. सिंह
12. गैया टेलीस्कोप द्वारा खोजा गया गैया BH3 कौन सा तारकीय द्रव्यमान वाला ब्लैक होल है?
a. पहला
b. दूसरा
c. तीसरा
d. चौथा
13. गैया BH3 का अनुमानित द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से कितना गुना अधिक है?
a. लगभग 10 गुना
b. लगभग 20 गुना
c. लगभग 33 गुना
d. लगभग 50 गुना
14. तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल का निर्माण मुख्य रूप से किससे होता है?
a. ग्रहों के टकराने से
b. छोटे तारों के समूह से
c. विशाल तारों के ढहने से
d. धूमकेतुओं के टकराने से
15. गैया टेलीस्कोप किस वर्ष से हमारी आकाशगंगा में तारों की गति की निगरानी कर रहा है?
a. 2010 से
b. 2013 से
c. 2016 से
d. 2020 से
A4.
गहरा सागर स्टेशन: चीन का नया मिशन
Deep
Sea Station: China's New Mission
चीन ने दक्षिण चीन सागर में एक गहरे पानी के अंतरिक्ष स्टेशन, जिसका नाम 'कोल्ड सीप' है, को स्थापित करने की मंजूरी दे दी है।
यह एक इकोसिस्टम अनुसंधान सुविधा होगी, जिसका मतलब है कि इसका मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र के वातावरण और उसमें रहने वाले जीवों का अध्ययन करना है।
'कोल्ड सीप' को रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर की सतह से 2,000 मीटर
(6,560 फीट) की गहराई पर स्थापित किया जाएगा। यह क्षेत्र कई देशों के बीच क्षेत्रीय दावों का विषय भी है।
यह सुविधा अब तक की सबसे गहरी और तकनीकी रूप से उन्नत अंडरवाटर इंस्टॉलेशन में से एक होगी।
अनुमान है कि यह स्टेशन लगभग वर्ष
2030 तक काम करना शुरू कर देगा।
इसमें एक साथ छह वैज्ञानिकों के रहने की व्यवस्था होगी, जो एक महीने तक चलने वाले अनुसंधान मिशन पर जा सकेंगे।
इस नियोजित सुविधा को अनुसंधान समुदाय के बीच गहरे समुद्र के अंतरिक्ष स्टेशन के रूप में भी जाना जा रहा है। यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह पृथ्वी पर एक दुर्गम और अलग-थलग स्थान पर जीवन और प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए एक आधार के रूप में कार्य करेगा, कुछ उसी तरह जैसे बाहरी अंतरिक्ष में एक अंतरिक्ष स्टेशन काम करता है।
इस स्टेशन का उपयोग मुख्य रूप से कोल्ड सीप पारिस्थितिकी तंत्र और मीथेन-समृद्ध हाइड्रोथर्मल वेंट का अध्ययन करने के लिए किया जाएगा।
·
कोल्ड सीप ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ समुद्र तल से मीथेन और अन्य हाइड्रोकार्बन धीरे-धीरे रिसते हैं। ये क्षेत्र अद्वितीय सूक्ष्मजीवों और जानवरों के समुदायों का समर्थन करते हैं जो इन रसायनों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
·
मीथेन-समृद्ध हाइड्रोथर्मल वेंट समुद्र तल में दरारें हैं जहाँ से गर्म, खनिज युक्त पानी निकलता है। ये वेंट भी विशिष्ट प्रकार के जीवन का समर्थन करते हैं।
वैज्ञानिक मीथेन हाइड्रेट्स का भी अध्ययन करेंगे, जिन्हें ज्वलनशील बर्फ भी कहा जाता है। ये मीथेन के बर्फ जैसे क्रिस्टलीय संरचनाएं हैं जो समुद्र तल के नीचे प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं और ऊर्जा का एक संभावित भविष्य का स्रोत हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न:
16. चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर में स्थापित किए जाने वाले गहरे पानी के स्टेशन का नाम क्या है?
a. ओशियन डेप्थ
b. डीप सी हब
c. कोल्ड सीप
d. मेराइन रिसर्च स्टेशन
17. 'कोल्ड सीप' इकोसिस्टम अनुसंधान सुविधा समुद्र की सतह से कितनी गहराई पर स्थापित की जाएगी?
a. 1000 मीटर
b. 1500 मीटर
c. 2000 मीटर
d. 2500 मीटर
18. अनुमान के अनुसार, 'कोल्ड सीप' स्टेशन किस वर्ष तक चालू होने की संभावना है?
a. 2025
b. 2028
c. 2030
d. 2035
19. 'कोल्ड सीप' स्टेशन पर एक बार में कितने वैज्ञानिक अनुसंधान मिशन पर जा सकेंगे?
a. चार
b. पाँच
c. छह
d. सात
20. 'कोल्ड सीप' स्टेशन का उपयोग मुख्य रूप से किन पारिस्थितिक तंत्रों और संसाधनों का अध्ययन करने के लिए किया जाएगा?
a. प्रवाल भित्तियाँ और मछली पालन
b. मैंग्रोव वन और ज्वारीय क्षेत्र
c. कोल्ड सीप पारिस्थितिकी तंत्र और मीथेन-समृद्ध हाइड्रोथर्मल वेंट
d. खुले समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र और समुद्री धाराएँ
A5.
दुर्लभ रक्त,
नई उम्मीद: बॉम्बे ब्लड ग्रुप में सफल किडनी ट्रांसप्लांट
Rare
Blood, New Hope: Successful Kidney Transplant in Bombay Blood Group
मुंबई के जसलोक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र ने एक अत्यंत दुर्लभ 'बॉम्बे' रक्त समूह वाले रोगी में भारत का पहला सफल किडनी प्रत्यारोपण किया है।
प्राप्तकर्ता शिरडी की 30 वर्षीय महिला हैं, जो 2022 से मधुमेह के कारण किडनी फेलियर से जूझ रही थीं।
'बॉम्बे' रक्त समूह भारत में पहली बार पहचाना गया था और यह असाधारण रूप से दुर्लभ है। यह लगभग 10,000 भारतीयों में से केवल एक और विश्व स्तर पर दस लाख लोगों में से एक में पाया जाता है।
सामान्य रक्त समूहों के विपरीत, 'बॉम्बे' रक्त समूह वाले व्यक्तियों में एच एंटीजन की कमी होती है। इस कारण से, उनका रक्त ओ-नेगेटिव सहित सभी सामान्य रक्त प्रकारों के साथ असंगत होता है, जिससे रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) और अंग प्रत्यारोपण दोनों ही चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।
'बॉम्बे' रक्त समूह को एचएच रक्त समूह के रूप में भी जाना जाता है। इसकी खोज 1952 में मुंबई में वाई.एम. भेंडे ने की थी। एच एंटीजन की अनुपस्थिति के कारण इसे एचएच रक्त समूह कहा जाता है।
यह सफलता चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो दुर्लभ रक्त समूहों वाले रोगियों के लिए नई उम्मीदें जगाता है। ऐसे जटिल मामलों में विशेषज्ञता और उन्नत चिकित्सा तकनीकों का महत्व स्पष्ट होता है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 'बॉम्बे' रक्त समूह वाले व्यक्तियों को रक्त या अंगों की आवश्यकता होने पर विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि उन्हें केवल 'बॉम्बे' रक्त समूह का रक्त या अंग ही चढ़ाया जा सकता है। ऐसे मामलों में, दाताओं की पहचान और समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न:
21. भारत का पहला सफल किडनी प्रत्यारोपण 'बॉम्बे' रक्त समूह वाले रोगी में किस अस्पताल में हुआ?
a) अपोलो अस्पताल, चेन्नई
b) एम्स, नई दिल्ली
c) जसलोक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र, मुंबई
d) क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर
22. शिरडी की महिला, जिसने 2022 से किडनी फेलियर का सामना किया, का रक्त समूह क्या है?
a) ओ-नेगेटिव
b) ए-पॉजिटिव
c) बॉम्बे रक्त समूह
d) एबी-पॉजिटिव
23. 'बॉम्बे' रक्त समूह की खोज किस वर्ष हुई थी?
a) 1942
b) 1952
c) 1962
d) 1972
24. 'बॉम्बे' रक्त समूह वाले व्यक्तियों में किस एंटीजन की कमी होती है?
a) ए एंटीजन
b) बी एंटीजन
c) एच एंटीजन
d) आरएच एंटीजन
25. 'बॉम्बे' रक्त समूह वाले व्यक्ति को रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के लिए किस रक्त समूह का रक्त चढ़ाया जा सकता है?
a) ओ-नेगेटिव
b) सभी सामान्य रक्त समूह
c) केवल 'बॉम्बे' रक्त समूह
d) ए, बी, और ओ रक्त समूह
A6.
गाँठदार त्वचा रोग से सुरक्षा: बायोलम्पिवैक्सीन
Protection
from Lumpy Skin Disease: Biolampivac
भारत बायोटेक समूह की पशु स्वास्थ्य वैक्सीन निर्माता कंपनी बायोवेट ने डेयरी मवेशियों और भैंसों के लिए एक नई वैक्सीन विकसित की है, जिसका नाम बायोलम्पिवैक्सीन है।
इस वैक्सीन को विकसित करने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR) ने बायोवेट का सहयोग किया है।
बायोलम्पिवैक्सीन को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से लाइसेंस प्राप्त हो गया है, जिसका मतलब है कि यह अब उपयोग के लिए सुरक्षित और प्रभावी मानी गई है।
यह वैक्सीन गाँठदार त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease - LSD) से पशुओं को सुरक्षा प्रदान करेगी। LSD एक वायरल रोग है जो मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करता है, जिससे उनकी त्वचा पर गांठें बन जाती हैं, बुखार आता है और दूध उत्पादन कम हो जाता है।
बायोलम्पिवैक्सीन की एक खास बात यह है कि यह विश्व स्तर पर LSD के लिए पहली संक्रमित से टीकाकृत पशुओं (Differentiating Infected
from Vaccinated Animals - DIVA) मार्कर वैक्सीन है।
DIVA वैक्सीन की खूबी यह है कि यह स्वाभाविक रूप से संक्रमित पशुओं और टीका लगाए गए पशुओं के बीच सीरोलॉजिकल भेदभाव करने में सक्षम है। इसका मतलब है कि परीक्षणों से यह पता लगाया जा सकता है कि पशु में संक्रमण है या उसे सिर्फ टीका लगाया गया है। यह रोग की निगरानी और नियंत्रण में बहुत मददगार साबित होगा।
इस स्वदेशी लाइव-एटेन्यूएटेड मार्कर वैक्सीन को आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्वाइन्स, हिसार से प्राप्त एलएसडी वायरस/रांची/2019 वैक्सीन स्ट्रेन का उपयोग करके बनाया गया है।
बायोवेट की मल्लूर
(Mallur) स्थित उत्पादन इकाई में सालाना 500 मिलियन खुराक वैक्सीन का उत्पादन करने की क्षमता है।
यह वैक्सीन जल्द ही व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों को अपने पशुधन को LSD से बचाने में मदद मिलेगी।
गाँठदार त्वचा रोग (LSD) मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों और किलनी जैसे रक्त चूसने वाले कीड़ों के माध्यम से फैलता है। संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क से भी यह रोग फैल सकता है।
LSD के कारण पशुओं में दूध उत्पादन में कमी, वजन घटना, बांझपन और गंभीर मामलों में मृत्यु भी हो सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होता है।
बायोलम्पिवैक्सीन इस बीमारी से बचाव का एक महत्वपूर्ण साधन साबित होगी और पशुधन अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में मदद करेगी।
बहुविकल्पीय प्रश्न:
26. बायोलम्पिवैक्सीन किस रोग से बचाव के लिए विकसित की गई है?
a. खुरपका-मुंहपका रोग
b. गलघोंटू
c. गाँठदार त्वचा रोग (LSD)
d. ब्रुसेलोसिस
27. बायोलम्पिवैक्सीन को विकसित करने में किस संस्थान ने बायोवेट का सहयोग किया?
a. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (ICMR)
b. वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (CSIR)
c. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR)
d. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)
28. बायोलम्पिवैक्सीन किस प्रकार की वैक्सीन है जो संक्रमित और टीकाकृत पशुओं के बीच अंतर कर सकती है?
a. निष्क्रिय वैक्सीन
b. जीवित क्षीणित वैक्सीन
c. सबयूनिट वैक्सीन
d. डीवा (DIVA) मार्कर वैक्सीन
29. बायोवेट की मल्लूर इकाई में सालाना बायोलम्पिवैक्सीन की कितनी खुराक का उत्पादन करने की क्षमता है?
a. 50 मिलियन
b. 100 मिलियन
c. 250 मिलियन
d. 500 मिलियन
30. गाँठदार त्वचा रोग (LSD) मुख्य रूप से किसके माध्यम से फैलता है?
a. दूषित भोजन और पानी से
b. हवा के माध्यम से
c. मच्छरों, मक्खियों और किलनी जैसे रक्त चूसने वाले कीड़ों से
d. मिट्टी के संपर्क से
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